राजस्थान की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश के दिग्गज नेता और कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा (Dr. Kirodi Lal Meena) स्वाइन फ्लू (Swine Flu H1N1) की चपेट में आ गए हैं। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें तुरंत जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के आईसीयू (ICU) वार्ड में एडमिट कराया गया है। फिलहाल, विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की सघन निगरानी कर रही है।
मंगलवार शाम को अचानक बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, मंगलवार (25 अगस्त) शाम को डॉ. मीणा की सेहत अचानक नासाज हो गई। इसके बाद उनकी मेडिकल जांच की गई, जिसमें स्वाइन फ्लू संक्रमण की पुष्टि हुई। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के तुरंत बाद एहतियात के तौर पर उन्हें एसएमएस अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट किया गया, ताकि उन्हें बेहतर और त्वरित चिकित्सा सुविधा मिल सके।
सीएम भजनलाल ने फोन पर जाना हालचाल
मंत्री के बीमार होने की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने डॉ. किरोड़ी लाल मीणा से फोन पर बातचीत की और उनकी कुशलक्षेम पूछी। इससे पहले मुख्यमंत्री ने डॉ. मीणा के भाई जगमोहन मीणा से भी संपर्क कर स्वास्थ्य का अपडेट लिया था। सीएम ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी को निर्देश दिए हैं कि मंत्री के इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए और उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत प्रदेश के कई अन्य नेताओं और शुभचिंतकों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
इधर, चिकित्सा मंत्री ने दिया था अलर्ट
यह भी एक संयोग है कि जिस दिन कृषि मंत्री को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई, ठीक उसी दिन प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर मौसमी बीमारियों को लेकर अधिकारियों की क्लास ले रहे थे। मंगलवार को ही स्वास्थ्य भवन में आयोजित एक अहम समीक्षा बैठक में उन्होंने स्वाइन फ्लू, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए कड़े निर्देश जारी किए थे।
हाई रिस्क क्षेत्रों में विशेष मॉनिटरिंग के निर्देश
चिकित्सा मंत्री ने सभी संयुक्त निदेशकों से संभागवार फीडबैक लेते हुए स्पष्ट कहा है कि स्वाइन फ्लू के बचाव को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाए। उन्होंने अस्पतालों में जांच सेवाओं, उपकरणों और दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही, अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हाई रिस्क वाले क्षेत्रों में विशेष टीमें बनाकर नियमित रूप से निगरानी की जाए।