मुंबई/नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में बड़ी फूट की खबरें सामने आईं। दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने अलग रुख अपनाते हुए शिंदे गुट के साथ जाने की तैयारी कर ली है।

सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र भेजकर अपने अलग समूह को मान्यता देने की मांग की है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक पुष्टि और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों धड़ों के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई पहले से जारी है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला गुट पहले ही शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर उद्धव ठाकरे गुट से अलग हो चुका है।

संजय राउत ने बागियों पर साधा निशाना

मामले को लेकर शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने पार्टी छोड़ने की अटकलों पर नाराजगी जताई और बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला। राउत ने कहा कि कुछ लोग सत्ता और दबाव की राजनीति के चलते पार्टी बदल रहे हैं।

राउत ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और राजनीतिक दबाव का इस्तेमाल किया जा रहा है।

लोकसभा में बदल सकता है समीकरण

अगर बागी सांसदों को लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता मिलती है, तो इसका असर संसद में शिवसेना (UBT) की स्थिति पर पड़ सकता है। वहीं शिंदे गुट इसे अपने विस्तार के तौर पर देख रहा है।

महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़

शिवसेना में पहले 2022 में बड़ा विभाजन हुआ था, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में कई विधायकों ने उद्धव ठाकरे सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई। अब लोकसभा सांसदों के स्तर पर संभावित टूट ने पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि बागी सांसदों को लेकर चुनाव आयोग और लोकसभा सचिवालय क्या फैसला लेते हैं और इसका महाराष्ट्र की राजनीति पर कितना असर पड़ता है।