नई दिल्ली: संसद के भीतर इन दिनों अगर कोई युवा नेता लगातार जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठा रहा है, तो वह हैं राघव चड्ढा। अपने बेबाक अंदाज और मुद्दों की गहराई के लिए पहचाने जाने वाले चड्ढा ने इस बार एक बेहद संवेदनशील और जरूरी विषय—पितृत्व अवकाश (Paternity Leave)—को लेकर आवाज बुलंद की है।

“बधाई दोनों को, जिम्मेदारी सिर्फ एक पर क्यों?”

राज्यसभा में बोलते हुए राघव चड्ढा ने एक सीधा लेकिन गहरा सवाल उठाया—
जब बच्चे के जन्म पर बधाई मां और पिता दोनों को दी जाती है, तो देखभाल की जिम्मेदारी सिर्फ मां पर क्यों छोड़ दी जाती है?

उन्होंने कहा कि आज के दौर में यह सोच बदलने की जरूरत है।
पिता को अपने नवजात बच्चे और नौकरी के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए
प्रसव के बाद मां को सबसे ज्यादा जरूरत अपने जीवनसाथी के साथ की होती है
बच्चे की परवरिश “साझा जिम्मेदारी” है, और यह बात कानून में भी दिखनी चाहिए

सोशल मीडिया पर भी रखी दिल की बात

राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपनी बात रखते हुए लिखा कि भारत में पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाना समय की मांग है।उनका मानना है कि यह सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि परिवार और समाज दोनों के लिए जरूरी बदलाव है।

सिर्फ यही नहीं, कई मुद्दों पर रहे मुखर

राघव चड्ढा लगातार आम लोगों से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाते रहे हैं।

  • बैंकिंग में मिनिमम बैलेंस चार्ज हटाने की मांग
  • दूध और खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ आवाज
  • ट्रैफिक जाम से होने वाले समय और आर्थिक नुकसान पर चिंता
  • मोबाइल डेटा रोलओवर का मुद्दा
  • फ्लाइट देरी पर यात्रियों को मुआवजे की मांग
  • एयरपोर्ट पर महंगे खाने-पीने की कीमतों पर सवाल
  • सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चिंता

क्यों जरूरी है पितृत्व अवकाश?

आज के बदलते समाज में पितृत्व अवकाश सिर्फ एक “छुट्टी” नहीं, बल्कि एक सोच है—

  • नवजात बच्चे को दोनों माता-पिता का साथ मिलता है
  • परिवार में जिम्मेदारियों का संतुलन बनता है
  • पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत होते हैं
  • मां की रिकवरी और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है

क्या बदलेगा अगर कानून बना?

अगर पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बना दिया जाता है, तो यह भारत में

  • कार्य संस्कृति
  • पारिवारिक संतुलन
  • और लैंगिक समानता

तीनों में बड़ा बदलाव ला सकता है।