जयपुर। राजस्थान की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। भाजपा की टोंक जनसभा के बाद शुरू हुई बयानबाज़ी अब कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों और पुराने विवादों को फिर से चर्चा में ले आई है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट हैं, जिन पर भाजपा और कांग्रेस दोनों के बड़े नेताओं के बयान सामने आए हैं।

दरअसल, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राजस्थान दौरे के दौरान टोंक में आयोजित जनसभा में भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहनदास अग्रवाल ने सचिन पायलट पर तंज कसते हुए उन्हें “बहुरूपिया” बताया। उन्होंने कहा कि पायलट की “एक टांग कांग्रेस में है और दूसरी कहीं और”, जिससे यह संकेत देने की कोशिश की गई कि पायलट की राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।

यह बयान सामने आते ही कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने न सिर्फ पायलट का बचाव किया, बल्कि भाजपा पर सीधा हमला भी बोला। गहलोत ने कहा, “सचिन पायलट की दोनों टांगे कांग्रेस में हैं और आगे भी कांग्रेस में ही रहेंगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग पहले कांग्रेस के विधायकों को गुमराह करके मानेसर ले गए थे, अब वही लोग भटकेंगे।

क्या है ‘मानेसर’ का पूरा मामला?

इस बयानबाज़ी के बीच एक बार फिर 2020 का चर्चित मानेसर राजनीतिक संकट सुर्खियों में आ गया है। उस समय सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर चले गए थे, जिससे राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर संकट खड़ा हो गया था। करीब 34 दिनों तक चला यह राजनीतिक ड्रामा राज्य की राजनीति का बड़ा मोड़ साबित हुआ था।

गहलोत लगातार इस प्रकरण का जिक्र कर रहे हैं। हाल के दिनों में उन्होंने कई बार कहा कि यह पूरा घटनाक्रम भाजपा की साजिश का हिस्सा था, जिसका मकसद कांग्रेस सरकार को गिराना था।

क्यों फिर उठ रहा है यह मुद्दा?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मानेसर प्रकरण को बार-बार उठाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

भाजपा इस मुद्दे के जरिए कांग्रेस के अंदर मतभेद दिखाने की कोशिश कर रही है।

गहलोत इसे उठाकर यह संदेश देना चाहते हैं कि अब पार्टी एकजुट है और पिछली गलतियों से सीख ली जा चुकी है।

आगामी राजनीतिक रणनीतियों के मद्देनज़र पुराने मुद्दों को फिर से उछालकर माहौल बनाया जा रहा है।

गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के नेता जानबूझकर सचिन पायलट का नाम लेकर कांग्रेस में फूट डालना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि “वे चाहते हैं कि मैं पायलट का नाम लूं ताकि पार्टी में विवाद खड़ा हो, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।”

पायलट की चुप्पी ने बढ़ाया सस्पेंस

पूरे घटनाक्रम में सबसे खास बात यह है कि सचिन पायलट ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उनकी चुप्पी ने सियासी हलकों में और ज्यादा अटकलों को जन्म दे दिया है।

आगे क्या?

राजस्थान की राजनीति में इस समय बयानबाज़ी के जरिए माहौल गर्माया हुआ है। मानेसर प्रकरण का बार-बार जिक्र यह संकेत देता है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और गहराई से उठ सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सचिन पायलट इस पूरे विवाद पर कब और क्या प्रतिक्रिया देते हैं, और क्या इससे प्रदेश की राजनीति में कोई नया मोड़ आता है।