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अच्छे नंबर लाने पर छात्राओं को मिला खास इनाम, प्रिंसिपल ने करवाई हेलिकॉप्टर की सैर

Web Desk 6 months ago
राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में एक सरकारी स्कूल की तीन छात्राओं ने टेस्ट में टॉप किया तो प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका ने उन्हें खास इनाम दिया। छात्राओं की इच्छा पर उन्होंने अपने निजी खर्च से जयपुर के पास चौमूं से हेलिकॉप्टर में 30 मिनट की हवाई सैर करवाई, जिससे उनका सपना सच हो गया।
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23जिले से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां सरकारी स्कूल की तीन छात्राओं का सपना उनके प्रिंसिपल ने सच कर दिखाया। अच्छे मार्क्स आने पर इन छात्राओं को ऐसा इनाम मिला, जिसकी उन्होंने शायद कभी कल्पना भी नहीं की थी।

दरअसल, जिले के केराप गांव स्थित महात्मा गांधी गवर्नमेंट स्कूल में आठवीं बोर्ड परीक्षा से पहले एक टेस्ट आयोजित किया गया था। इस टेस्ट में खुशी मेहरा, रंजना कड़वा और ज्योति ने टॉप-3 में जगह बनाई। जब स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका ने इन छात्राओं से पूछा कि वे इनाम में क्या चाहती हैं, तो तीनों ने मजाक में हेलिकॉप्टर में बैठने की इच्छा जाहिर कर दी।

प्रिंसिपल ने छात्राओं की इस इच्छा को गंभीरता से लिया और ‘सपनों की उड़ान’ पहल के तहत अपने निजी खर्च से इसे पूरा करने का फैसला किया। पहले हेलिकॉप्टर उड़ान नागौर से कराने की योजना बनाई गई थी, लेकिन तकनीकी कारणों और एटीसी की अनुमति नहीं मिलने के कारण अंतिम समय में स्थान बदलना पड़ा।

इसके बाद प्रिंसिपल तीनों छात्राओं को जयपुर के पास चौमूं लेकर पहुंचे, जहां से सुबह करीब साढ़े 11 बजे निजी हेलिकॉप्टर से उड़ान भरी गई। करीब 30 मिनट तक छात्राओं ने आसमान से जयपुर शहर और आसपास के इलाकों को देखा। हेलिकॉप्टर में बैठकर शहर की सैर करना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा अनुभव था।

हेलिकॉप्टर से उतरने के बाद छात्राओं ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी इच्छा इतनी जल्दी पूरी हो जाएगी। छात्रा खुशी मेहरा ने बताया कि जब घरवालों को हेलिकॉप्टर में बैठने की बात पता चली तो वे बेहद खुश हुए और उन्हें गर्व महसूस हुआ। वहीं रंजना कड़वा ने कहा कि उन्होंने तो मजाक में हेलिकॉप्टर सवारी की बात कही थी, लेकिन आज वह सच हो गई। छात्रा ज्योति ने भी बताया कि पहले उन्हें लगा था कि सर मजाक कर रहे हैं, लेकिन जब प्रिंसिपल खुद उनके घर पहुंचे और सैर की जानकारी दी तो उन्हें यकीन हुआ।

इस पहल पर प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए। बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करना भी उतना ही जरूरी है। उनका मानना है कि यदि बच्चों को सही प्रोत्साहन मिले तो वे जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

यह अनोखी पहल न केवल छात्राओं के लिए यादगार बन गई, बल्कि यह भी दिखाती है कि अगर शिक्षक चाहें तो वे अपने छात्रों के सपनों को नई उड़ान दे सकते हैं।

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