रेप के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को बड़ा झटका लगा है। आसाराम ने गुजरात हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने के लिए दायर अपनी अर्जी वापस ले ली है। ऐसे में उसकी अंतरिम राहत को आगे बढ़ाने की मांग फिलहाल समाप्त हो गई है।
आसाराम को सूरत की एक युवती से दुष्कर्म के मामले में गांधीनगर सेशंस कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं राजस्थान के चर्चित नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले में भी वह उम्रकैद की सजा भुगत रहा है।
15 जून तक बढ़ाई गई थी अंतरिम जमानत
गुजरात हाईकोर्ट ने पहले आसाराम की अंतरिम जमानत को 15 जून 2026 तक बढ़ाया था। इसके बाद आसाराम ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जमानत अवधि आगे बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि अब उसने अपनी यह याचिका वापस ले ली है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखी सजा
आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपनी उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी। लेकिन 27 मई 2026 को हाईकोर्ट ने उसकी सजा को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद आसाराम ने 28 मई को जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर किया था।
जमानत बढ़ाने का हुआ था विरोध
सरकारी पक्ष ने आसाराम की अंतरिम जमानत बढ़ाने का विरोध किया था। दलील दी गई थी कि राजस्थान हाईकोर्ट में उसकी अपील पर फैसला आ चुका है और सजा बरकरार रखी गई है, इसलिए उसे अतिरिक्त राहत नहीं दी जानी चाहिए।
जेल में चिकित्सा सुविधाएं जारी रखने के आदेश
हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम को जेल में विशेष चिकित्सा सुविधाएं और अल्कलाइन पानी उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि किसी कैदी की उम्र और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें केवल इसलिए समाप्त नहीं हो जातीं क्योंकि उसकी अपील का निस्तारण हो चुका है।
जस्टिस संजीत पुरोहित की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि गंभीर बीमारियों से ग्रस्त कैदी को पूर्व में दी गई चिकित्सा और सहायक सुविधाएं जारी रखी जानी चाहिए ताकि उसके स्वास्थ्य और मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
फिलहाल आसाराम जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद है और दोनों मामलों में मिली उम्रकैद की सजा काट रहा है।