जयपुर/जोधपुर/जैसलमेर। राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ ने खेल कोटे (Sports Quota) के तहत नियुक्त कर्मचारी की बर्खास्तगी के मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है
जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता शेणी दान की याचिका को स्वीकार करते हुए सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) जोधपुर का फैसला और 11 साल पुराना बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया है
क्या था पूरा मामला?
जैसलमेर जिले के पोकरण रोड स्थित रेवत सिंह की ढाणी निवासी शेणी दान (पुत्र भीमा दान) ने रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत '26 अम्यूनिशन कंपनी' में मजदूर पद की भर्ती के लिए आवेदन किया था
चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेणी दान को मजदूर के पद पर नियुक्ति दे दी गई
इस आपत्ति के बाद विभाग ने 28 जुलाई 2015 को कारण बताओ नोटिस जारी किया और 31 अगस्त 2015 को शेणी दान की सेवाएं समाप्त (Terminate) कर दीं
CAT में नहीं मिली थी राहत
बर्खास्तगी के आदेश को शेणी दान ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT), जोधपुर में चुनौती दी
हाईकोर्ट में पक्षों के मुख्य तर्क
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याचिकाकर्ता के वकीलों का तर्क: शेणी दान ने आवेदन करते समय कोई झूठी जानकारी नहीं दी और न ही कोई तथ्य छुपाया
। उन्होंने स्पष्ट रूप से केवल राज्य स्तरीय खेल प्रमाण पत्र ही लगाया था । इसके अलावा, इसी भर्ती में समान स्तर के प्रमाण पत्र वाले अन्य अभ्यर्थियों को भी छूट (Relaxation) देकर नियुक्त रखा गया, लेकिन केवल याचिकाकर्ता को ही निशाना बनाकर सेवा से हटाया गया । -
विभाग का तर्क: केंद्र सरकार व रक्षा मंत्रालय के वकील अभिषेक शर्मा ने तर्क दिया कि नियमों के तहत केवल राष्ट्रीय स्तर के खेल प्रमाण पत्र धारक ही पात्र थे
। गलती से नियुक्ति दे दी गई थी, जिसे प्रोबेशन अवधि के दौरान नियमों के तहत निरस्त किया गया ।
हाईकोर्ट का मुख्य निर्णय और निर्देश
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा:
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बिना जांच के बर्खास्तगी अवैध: शो-कॉज नोटिस और टर्मिनेशन ऑर्डर को एक साथ पढ़ने से साफ है कि विभाग ने 'झूठी घोषणा/तथ्य छुपाने' के नियम का इस्तेमाल करके कर्मचारी को हटाया
। ऐसा आरोप कर्मचारी के करियर पर दाग (Stigma) लगाता है, इसलिए बिना विभागीय जांच कराए सीधी बर्खास्तगी गैर-कानूनी है । -
दोनों आदेश रद्द: हाईकोर्ट ने CAT जोधपुर के 29 मई 2024 के फैसले और 31 अगस्त 2015 के बर्खास्तगी आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया
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जांच और समानता का अधिकार: कोर्ट ने विभाग को यह छूट दी है कि यदि वे चाहें तो तथ्य छुपाने के आरोपों पर नियम अनुसार विभागीय जांच शुरू कर सकते हैं
। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समान स्तर के स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट वाले अन्य अभ्यर्थी नौकरी में बने हुए हैं, तो याचिकाकर्ता के मामले में भी उनके समान ही सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिए ।