रेगिस्तानी पश्चिमी राजस्थान में अब खजूर (डेट पाम) की खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है। सूखे और कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाने वाली यह फसल अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना रही है। इसी कड़ी में बीकानेर से पहली बार 11 टन से अधिक ताजे खजूर की खेप बांग्लादेश निर्यात की गई है। यह उपलब्धि स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के कृषि क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है।
'हलावी' किस्म के खजूर की विदेश में बढ़ी मांग
विश्वविद्यालय के खजूर अनुसंधान केंद्र से भेजी गई इस खेप में मुख्य रूप से 'हलावी' (Halawy) किस्म के प्रीमियम खजूर शामिल हैं। यह किस्म अपने बेहतर स्वाद, गुणवत्ता और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने के लिए जानी जाती है।
खजूर अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि बीकानेर क्षेत्र में उत्पादित खजूर की गुणवत्ता लगातार बेहतर हो रही है, जिसके कारण अब इसकी मांग केवल देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बढ़ने लगी है।
विश्वविद्यालय को हुआ करीब 10 लाख रुपये का राजस्व
इस निर्यात से स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय को करीब 10 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शुरुआत आने वाले वर्षों में राजस्थान के खजूर उत्पादकों के लिए बड़ा बाजार तैयार कर सकती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि इसी तरह निर्यात बढ़ता रहा तो स्थानीय किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा।
54 से अधिक किस्मों पर हो रहा शोध
बीकानेर स्थित खजूर अनुसंधान केंद्र में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की 'सूखे इलाकों के फलों पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना' के तहत खजूर की 54 से अधिक किस्मों का संरक्षण और अनुसंधान किया जा रहा है।
इन किस्मों में ऐसी प्रजातियों का विकास किया जा रहा है जो कम पानी, अधिक तापमान और रेगिस्तानी परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन दे सकें।
350 हेक्टेयर में हो रही खजूर की खेती
वर्तमान में बीकानेर जिले में लगभग 350 हेक्टेयर क्षेत्र में खजूर की खेती की जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में यह क्षेत्रफल और बढ़ सकता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेंद्र बाबू ने कहा कि यह राजस्थान के इतिहास में पहली बार हुआ है जब इतनी बड़ी मात्रा में ताजे खजूर का निर्यात किया गया है। उनके अनुसार, खजूर राजस्थान के किसानों के लिए "वरदान" साबित हो सकता है क्योंकि यह फसल कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है और बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
किसानों के लिए नई उम्मीद
राजस्थान सरकार और कृषि वैज्ञानिकों के प्रयासों से प्रदेश में खजूर की खेती को लगातार प्रोत्साहन मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधुनिक तकनीक, बेहतर पौध सामग्री और निर्यात बाजार का विस्तार जारी रहा, तो खजूर की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ राजस्थान की कृषि निर्यात क्षमता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।