राजस्थान में कच्चे तेल (Crude Oil) के उत्पादन को नई रफ्तार देने के लिए बड़ी तैयारी की जा रही है। राज्य में कच्चे तेल के उत्पादन को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 80 हजार बैरल प्रतिदिन (BOPD) तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए प्रदेश के अलग-अलग तेल बेसिन में नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल कर चरणबद्ध तरीके से उत्पादन बढ़ाया जाएगा।

वर्तमान में 52 हजार बैरल प्रतिदिन है उत्पादन

फिलहाल राजस्थान में प्रतिदिन करीब 51 हजार से 52 हजार बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है। उत्पादन के इस आंकड़े को 80 हजार बैरल तक ले जाने के लिए अधिकारियों को नवीनतम तकनीक के जरिए चरणबद्ध रूप से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे न केवल राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

इन बेसिन में अपनाई जाएगी ASP तकनीक

कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। बाड़मेर-सांचौर बेसिन और जैसलमेर बेसिन में तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए ASP (Alkaline Surfactant Polymer) तकनीक अपनाने की योजना है। यह एक उन्नत तकनीक है, जो पुराने या कम दबाव वाले कुओं से भी अधिकतम तेल निकालने में अत्यधिक कारगर साबित होती है।

बीकानेर-नागौर बेसिन में CSS तकनीक का होगा इस्तेमाल

दूसरी ओर, बीकानेर-नागौर बेसिन की भौगोलिक और भूगर्भीय स्थितियों को देखते हुए वहां CSS (Cyclic Steam Stimulation) तकनीक से उत्पादन बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इस तकनीक के जरिए भाप का उपयोग करके गाढ़े और भारी कच्चे तेल को आसानी से सतह तक लाया जा सकेगा, जिससे उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।

राजस्थान रिफाइनरी में ही होगा तेल का परिशोधन

इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि राजस्थान में उत्पादित होने वाले इस कच्चे तेल का परिशोधन (Refining) बाड़मेर के पचपदरा में बन रही राजस्थान रिफाइनरी में ही सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। रिफाइनरी में ही तेल के परिशोधन से न केवल ट्रांसपोर्टेशन के भारी खर्च और समय की बचत होगी, बल्कि राजस्थान को पेट्रोलियम हब के रूप में विकसित करने के सपने को भी मजबूती मिलेगी। रिफाइनरी को राज्य से ही पर्याप्त कच्चा माल मिलने से इसकी कार्यक्षमता और आर्थिक लाभ दोनों में वृद्धि होगी।