राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने गुरुवार को पाली जिले के सादड़ी में आयोजित नागेश्वर महादेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि गौरक्षा आंदोलन के दौरान साधुओं की मौत के बाद संत समाज ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को श्राप दिया था और बाद में वही सच साबित हुआ।

राज्यपाल बागड़े ने कहा कि स्वामी करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में 6 नवंबर 1966 को संसद के बाहर एक बड़ा गौरक्षा आंदोलन हुआ था। उस समय गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने का वादा पूरा नहीं होने के विरोध में देशभर से साधु-संत और गौभक्त आंदोलन में शामिल हुए थे।

उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान हुई फायरिंग में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। इस घटना से आहत संत समाज ने तत्कालीन सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई और इंदिरा गांधी को श्राप दिया था। राज्यपाल के अनुसार, स्वामी करपात्री जी महाराज ने कहा था कि "साधुओं की जैसी हत्या हुई है, वैसे ही रास्ते से आपका भी अंत होगा।"

ममता बनर्जी पर बिना नाम लिए साधा निशाना

अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने महाराणा प्रताप के राजतिलक का प्रसंग सुनाते हुए बिना नाम लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी तंज कसा।

उन्होंने कहा कि महाराणा उदय सिंह के निधन के बाद जगमाल राजगद्दी छोड़ने को तैयार नहीं थे और कहते थे कि उन्हें ही राजा घोषित किया गया है। राज्यपाल ने आगे कहा, "पद नहीं छोड़ने की यह परंपरा आज भी चल रही है। मैं नहीं हटूंगी, मैं नहीं हारी, मैं मुख्यमंत्री पद से नहीं हटूंगी। शायद उन्होंने जगमाल को पढ़ा होगा।"

नागेश्वर महादेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में हुए शामिल

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े सुबह करीब 11 बजे सादड़ी पहुंचे। उन्होंने बस स्टैंड स्थित आजाद मैदान शिवनगरी में व्यासपीठ पूजन किया और मंदिर निर्माण में विशेष योगदान देने वाली दानदाता लाड़ कंवर का सम्मान किया।

इसके बाद वे जाटों के डोरण स्थित मंदिर परिसर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान शिव की पूजा-अर्चना की, संतों का आशीर्वाद लिया और गौ-पूजन भी किया।

कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में पूर्व मंत्री अचलाराम मेघवाल, बाली विधायक पुष्पेंद्र सिंह राणावत, जिला कलेक्टर रविंद्र गोस्वामी, पुलिस अधीक्षक मोनिका सेन, डीएसपी चैनसिंह महेचा, एडीएम शैलेन्द्र सिंह, एसडीएम दिनेश बिश्नोई सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और श्रद्धालु मौजूद रहे।

राज्यपाल का यह बयान अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।