बिजली बचाने के लिए जयपुर डिस्कॉम की नई पहल
जयपुर। गर्मी के मौसम में लगातार बढ़ती बिजली मांग और ग्रिड पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करने के लिए जयपुर डिस्कॉम ने एक अभिनव पहल शुरू की है। इसके तहत शहर के वैशाली नगर, मानसरोवर और मालवीय नगर क्षेत्रों के करीब 2 हजार घरेलू उपभोक्ताओं के एयर कंडीशनर (एसी) में मुफ्त स्मार्ट आईओटी डिवाइस लगाई जा रही है। इस तकनीक के जरिए बिजली की खपत को स्मार्ट तरीके से नियंत्रित किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं और बिजली व्यवस्था दोनों को लाभ मिलेगा।
देश में पहली बार लागू हो रही यह तकनीक
डिस्कॉम अधिकारियों के अनुसार देश में पहली बार किसी विद्युत वितरण निगम की ओर से घरेलू उपभोक्ताओं के एसी को ऑटोमेटेड डिमांड रिस्पांस (ADR) तकनीक से जोड़ा जा रहा है। इस परियोजना को प्रौद्योगिकी कंपनी फ्लॉक एनर्जी के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य पीक ऑवर्स में बिजली मांग को संतुलित रखना और ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है।
पीक ऑवर्स में नियंत्रित होगी बिजली खपत
गर्मी के दिनों में बड़ी संख्या में एसी चलने के कारण बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है। इससे विद्युत ग्रिड और वितरण तंत्र पर अतिरिक्त भार पड़ता है। नई एडीआर तकनीक ऐसे समय में एसी की बिजली खपत को स्वचालित रूप से नियंत्रित करेगी। इससे बिजली की मांग संतुलित रहेगी और ग्रिड को ओवरलोड होने से बचाया जा सकेगा।
ऐसे काम करेगी स्मार्ट आईओटी डिवाइस
यह स्मार्ट डिवाइस दो हिस्सों में कार्य करती है। इसका पहला भाग घर के सामान्य बिजली सॉकेट में लगाया जाता है, जबकि दूसरा भाग एसी यूनिट से जोड़ा जाता है। यह डिवाइस घर के वाई-फाई नेटवर्क के माध्यम से ग्रिड प्रबंधन प्रणाली से लगातार जुड़ी रहती है।
जब बिजली की मांग अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचती है, तब यह डिवाइस कमरे के आरामदायक तापमान को बनाए रखते हुए एसी के तापमान में लगभग एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि कर देती है। इस बदलाव का उपभोक्ता को विशेष रूप से एहसास नहीं होता, लेकिन बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी आ जाती है।
बिजली बिल में होगी सीधी बचत
डिस्कॉम का दावा है कि यदि कोई उपभोक्ता प्रतिदिन 6 से 8 घंटे तक एसी का उपयोग करता है, तो इस तकनीक की सहायता से बिजली की खपत में 3 से 6 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। इससे उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल में सीधी बचत होगी और ऊर्जा दक्षता भी बढ़ेगी।
1 मेगावाट तक कम हो सकती है बिजली मांग
अधिकारियों के अनुसार यदि 2 हजार उपभोक्ताओं के एसी इस तकनीक से जुड़ जाते हैं तो पीक ऑवर्स में बिजली मांग में करीब 1 मेगावाट तक की कमी लाई जा सकती है। यह बचत विद्युत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और आपूर्ति प्रबंधन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।
ट्रिपिंग और फॉल्ट की समस्या से मिलेगी राहत
बिजली मांग नियंत्रित रहने से ग्रिड और वितरण नेटवर्क पर दबाव कम होगा। इससे ट्रिपिंग, वोल्टेज उतार-चढ़ाव और तकनीकी फॉल्ट जैसी समस्याओं में भी कमी आने की संभावना है। उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर और बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली आपूर्ति मिल सकेगी।
स्मार्ट ग्रिड की दिशा में बड़ा कदम
डिस्कॉम अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना राजस्थान विद्युत नियामक प्राधिकरण के डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी एवं डिमांड साइड मैनेजमेंट विनियम-2026 के तहत शुरू की गई है। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो आने वाले समय में इसे अन्य शहरों और क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।
ऊर्जा संरक्षण, बिजली बचत और आधुनिक स्मार्ट ग्रिड सिस्टम के विकास की दिशा में यह परियोजना एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे न केवल बिजली व्यवस्था अधिक मजबूत होगी बल्कि उपभोक्ताओं को भी प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा।