राजस्थान की भजनलाल सरकार के सामने पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारियों का आंदोलन बड़ी प्रशासनिक चुनौती बनता जा रहा है। पिछले करीब 20 दिनों से ‘स्वाभिमान बचाओ आंदोलन’ के तहत पेन डाउन हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने अब आंदोलन को और तेज करते हुए जयपुर कूच का ऐलान कर दिया है।

पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन का असर प्रदेशभर की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों में साफ दिखाई दे रहा है। कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमाण पत्र, प्रशासनिक फाइलों और विकास कार्यों से जुड़ी कई सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। वहीं सरकार द्वारा आयोजित ‘ग्रामीण सेवा शिविर-2026’ का भी कर्मचारियों ने बहिष्कार कर रखा है।

संगठन ने 23 से 25 जून तक चरणबद्ध तरीके से जयपुर कूच की रणनीति बनाई है। 23 जून को सभी जिलों के पदाधिकारी जयपुर पहुंचेंगे। 24 जून को प्रदेश स्तरीय प्रतिनिधिमंडल सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को मांग पत्र सौंपेगा, जबकि 25 जून को ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी भी जयपुर पहुंचकर विभिन्न विभागों और सचिवालय में अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देंगे।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में उत्तराखंड पैटर्न पर मंत्रालयिक कैडर का पुनर्गठन, स्वतंत्र कार्य विभाजन नीति, अंतर-जिला स्थानांतरण नीति, पदनाम में बदलाव, हार्ड ड्यूटी भत्ता और अतिरिक्त पंचायत भत्ते की स्वीकृति शामिल है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जयपुर कूच के बाद भी सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 6 जुलाई को हजारों कर्मचारी जयपुर में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।

इसके अलावा 7 जुलाई को जयपुर के जलमहल के सामने ‘जल समाधि’ कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा भी की गई है। संगठन का कहना है कि यह कदम सरकार का ध्यान कर्मचारियों की समस्याओं की ओर आकर्षित करने के लिए उठाया जाएगा।

फिलहाल सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच किसी औपचारिक समझौते की स्थिति नहीं बनी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह आंदोलन राजस्थान की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।