धोरों की खामोशी में गूंजती बदलाव की दस्तक

बाड़मेर (राजस्थान): थार के मरुस्थल की वो तपती रेत, जहाँ दूर-दूर तक पानी की एक-एक बूंद के लिए मशक्कत करनी पड़ती है और जहाँ भारत-पाकिस्तान की सीमा का सन्नाटा हर रोज़ पहरा देता है—उसी सरहद से महज़ 3 किलोमीटर दूर बसे हाथला गांव की एक कहानी आज पूरे देश के लिए मिसाल बन चुकी है।

यह कहानी है 5वीं पास भूरी देवी की, जिन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस ‘दिल्ली’ का नाम उन्होंने सिर्फ किस्से-कहानियों में सुना था, उसी दिल्ली के आकाश में वे एक दिन हवाई जहाज से उड़ान भरकर देश के सबसे प्रतिष्ठित प्रांगण—'राष्ट्रपति भवन' कदम रखेंगी।

अक्षर ज्ञान भले कम, पर संकल्प में था अटूट विश्वास

भूरी देवी का बचपन और शुरुआती जीवन आम ग्रामीण महिलाओं जैसा ही बीता। पढ़ाई के सीमित साधनों के बीच वे केवल 5वीं तक ही पढ़ पाईं और उसके बाद खेती-किसानी तथा पशुपालन की ज़िम्मेदारियों में रम गईं। विवाह के बाद सुसराल में भी साक्षरता का अभाव था, लेकिन भूरी देवी की दृष्टि दूरगामी थी। उन्होंने अपनी विषमताओं को आड़े नहीं आने दिया और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर अपने चारों बेटों को अच्छी शिक्षा दिलवाई, जो आज सरकारी सेवाओं में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं।

बॉर्डर की अंतिम ढाणी तक पहुँचाई विकास की रोशनी

जब ग्रामीणों ने विश्वास जताकर भूरी देवी को हाथला ग्राम पंचायत की बागडोर सौंपी, तो उन्होंने सीमांत क्षेत्र की चुनौतियों को ही अपनी ताकत बना लिया।

  • जल संरक्षण: पानी की भारी किल्लत से जूझते इलाके में हर घर के लिए पानी के टांके बनवाए।

  • बुनियादी ढाँचा: सीमावर्ती गांव में पक्की सड़कों, स्कूलों और आवास योजनाओं को धरातल पर उतारा।

  • सुरक्षा व समन्वय: सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों और अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल बैठाकर 'वाइब्रेंट विलेज' योजना के तहत विकास कार्यों की गंगा बहाई।

'रेत के धोरों से लाल किले के प्रांगण तक'

गृह विभाग की अनुशंसा पर जब राष्ट्रपति भवन का आमंत्रण पत्र हाथला पहुँचा, तो पूरे बाड़मेर में जश्न का माहौल बन गया। स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर झंडारोहण देखने के साथ-साथ भूरी देवी राष्ट्रपति भवन के 'एट होम' रिसेप्शन में राजस्थान की एकमात्र महिला सरपंच प्रतिनिधि के तौर पर हिस्सा लेंगी।

यह सफर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो सीमा की बंदिशें और औपचारिक शिक्षा की कमी भी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकतीं।