‘दिल्ली का सिर्फ नाम सुना था...’: सरहद पर उम्मीद के दीप जलाने वाली भूरी देवी की जुबानी, एक असाधारण सरपंच की कहानी !

बाड़मेर के भारत-पाक बॉर्डर से सटे हाथला गांव की 5वीं पास सरपंच भूरी देवी को राष्ट्रपति भवन से स्वतंत्रता दिवस समारोह का न्योता मिला है। जानिए कैसे एक साधारण ग्रामीण महिला ने वाइब्रेंट विलेज और जल संरक्षण से बदली अपने गांव की तस्वीर।

kratika Jethwani
kratika Jethwani Sub Editor
August 13, 2026 • 4:33 PM | बाड़मेर  358
राजस्थान
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‘दिल्ली का सिर्फ नाम सुना था...’: सरहद पर उम्मीद के दीप जलाने वाली भूरी देवी की जुबानी, एक असाधारण सरपंच की कहानी !
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‘दिल्ली का सिर्फ नाम सुना था...’: सरहद पर उम्मीद के दीप जलाने वाली भूरी देवी की जुबानी, एक असाधारण सरपंच की कहानी !

धोरों की खामोशी में गूंजती बदलाव की दस्तक

बाड़मेर (राजस्थान): थार के मरुस्थल की वो तपती रेत, जहाँ दूर-दूर तक पानी की एक-एक बूंद के लिए मशक्कत करनी पड़ती है और जहाँ भारत-पाकिस्तान की सीमा का सन्नाटा हर रोज़ पहरा देता है—उसी सरहद से महज़ 3 किलोमीटर दूर बसे हाथला गांव की एक कहानी आज पूरे देश के लिए मिसाल बन चुकी है।

यह कहानी है 5वीं पास भूरी देवी की, जिन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस ‘दिल्ली’ का नाम उन्होंने सिर्फ किस्से-कहानियों में सुना था, उसी दिल्ली के आकाश में वे एक दिन हवाई जहाज से उड़ान भरकर देश के सबसे प्रतिष्ठित प्रांगण—'राष्ट्रपति भवन' कदम रखेंगी।

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