बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसव के बाद छह प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने के गंभीर मामले की जांच लगातार जारी है। घटना के कारणों का पता लगाने के लिए अब तक 33 प्रकार के दवाओं, इंजेक्शनों, ब्लड और अन्य चिकित्सा सामग्री के नमूने देश की विभिन्न प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं। हालांकि अब तक किसी भी जांच रिपोर्ट का इंतजार खत्म नहीं हुआ है और अस्पताल प्रशासन को एक भी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
जानकारी के अनुसार नमूनों को गाजियाबाद, कोलकाता, जयपुर, मुंबई और पुणे स्थित विशेषज्ञ लैब में परीक्षण के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी रिपोर्ट आने में करीब 20 से 25 दिन का समय लग सकता है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिलाओं की किडनी प्रभावित होने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्रग कंट्रोलर विभाग की टीम ने अस्पताल से उपयोग में ली गई दवाओं, इंजेक्शनों, ब्लड और अन्य चिकित्सा सामग्री के नमूने एकत्र किए हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं किसी दवा, इंजेक्शन या चिकित्सा प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी तो महिलाओं की बिगड़ी हालत की वजह नहीं बनी।
पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने बताया कि प्रभावित महिलाओं के उपचार के दौरान इस्तेमाल किए गए एंटीबायोटिक इंजेक्शन, जेंटामायसिन, ऑक्सीटोसिन, डेक्सोना इंजेक्शन, पैरासिटामोल टैबलेट समेत अन्य दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। इसके अलावा ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान उपयोग किए गए रक्त और उससे संबंधित दवाओं की भी जांच करवाई जा रही है।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक प्रसव और सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान मरीजों को दी गई प्रत्येक टैबलेट, कैप्सूल, इंजेक्शन, फ्लूड और अन्य औषधियों को जांच के दायरे में शामिल किया गया है। यहां तक कि सर्जरी में उपयोग की गई सिरिंज और डिस्पोजेबल सामग्री के नमूने भी परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।
एडिशनल ड्रग कंट्रोलर देवेंद्र केदावत ने बताया कि जिन महिलाओं की तबीयत बिगड़ी थी, उन्हें दी गई दवाओं और इंजेक्शनों के उपयोग पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। उनकी जगह नए बैच की दवाओं और इंजेक्शनों का उपयोग किया जा रहा है। जांच एजेंसियों को रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने के लिए भी पत्र भेजा गया है।
जांच के दौरान एक बड़ी खामी भी सामने आई है। अस्पताल रिकॉर्ड में मरीजों को दिए गए इंजेक्शन और दवाओं के बैच नंबर दर्ज नहीं किए गए थे। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि प्रभावित महिलाओं को किस बैच की दवा दी गई थी। इसी कारण उन दिनों उपयोग में मौजूद सभी संबंधित दवाओं और इंजेक्शनों को बदल दिया गया है।
ड्रग कंट्रोलर विभाग के अनुसार 3 जून को नागौर से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन मंगवाए गए थे। इससे पहले अस्पताल स्तर पर खरीदे गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन उपयोग में लिए जा रहे थे। वर्तमान में सरकारी खरीद के तहत आए नए इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि इसके बाद किडनी प्रभावित होने का केवल एक मामला सामने आया है।
फिलहाल पीबीएम अस्पताल के पोस्ट कोविड आईसीयू में दो प्रसूताएं प्रीति और शारदा वेंटिलेटर पर भर्ती हैं। वहीं कमला, इमरती और रायला का इलाज जारी है। तारा देवी की हालत में सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि इमरती को भी जल्द छुट्टी मिल सकती है।
इस पूरे मामले पर प्रदेशभर की नजरें टिकी हुई हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने के पीछे दवा, इंजेक्शन, चिकित्सा उपकरण या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था।