राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान किए गए पौधरोपण को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। करीब 1.06 लाख करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के बाद प्रधानमंत्री ने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधरोपण किया। हालांकि, कार्यक्रम के बाद सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने इस पूरे घटनाक्रम को सियासी बहस का विषय बना दिया।

क्या है पूरा मामला?

पचपदरा में पौधरोपण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि उन्हें 'खेजड़ी' का पौधा लगाने का सौभाग्य मिला। अपने संबोधन में भी उन्होंने राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इस अभियान के तहत खेजड़ी का पौधा लगाने का अवसर मिला।

लेकिन कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद कई स्थानीय लोगों, पर्यावरण प्रेमियों और विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि लगाया गया पौधा खेजड़ी नहीं, बल्कि पीपल का है। इसके बाद सोशल मीडिया पर 'पीपल बनाम खेजड़ी' को लेकर बहस तेज हो गई।

विपक्ष ने उठाए सवाल

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सरकार ने खेजड़ी की कोई नई किस्म विकसित कर ली है या फिर अधिकारियों ने प्रधानमंत्री से पीपल का पौधा लगवा दिया।

कांग्रेस नेता हरीश चौधरी ने भी इस मुद्दे पर भाजपा को घेरते हुए कहा कि जो लोग पीपल और खेजड़ी जैसे पूजनीय वृक्षों की पहचान नहीं कर पा रहे हैं, वे संस्कृति की रक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं।

इसके अलावा कांग्रेस सांसद संजना जाटव, विनोद जाखड़, अभिषेक चौधरी, निर्मल चौधरी, हेम सिंह और मनीष मिर्धा सहित कई नेताओं ने भी सोशल Media पर सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा।

अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

विपक्ष का आरोप है कि यह पूरा विवाद अधिकारियों और वीवीआईपी इवेंट मैनेजमेंट टीम की लापरवाही का परिणाम है। उनका कहना है कि पौधरोपण के लिए जिस पौधे की व्यवस्था की गई, उसकी पहचान को लेकर ब्रीफिंग में गलती हुई। इसी आधार पर प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में खेजड़ी का उल्लेख किया और बाद में सोशल मीडिया पर भी वही जानकारी साझा की गई।

भाजपा की चुप्पी

अब तक भाजपा, स्थानीय प्रशासन या रिफाइनरी प्रबंधन की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मामला सीधे प्रधानमंत्री के आधिकारिक भाषण और सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा होने के कारण पार्टी फिलहाल सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से बच रही है।

क्या है विवाद की सच्चाई?

फिलहाल यह विवाद सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और विपक्ष के दावों के आधार पर चर्चा में है। इस संबंध में किसी स्वतंत्र एजेंसी या सरकारी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि लगाया गया पौधा वास्तव में पीपल था या खेजड़ी। ऐसे में मामले की अंतिम स्थिति संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक सफाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।