जयपुर: राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में स्थानीय स्वशासन और 'गांव की सरकार' के गठन को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग तथा संबंधित जिला प्रशासनों द्वारा आगामी पंचायती राज चुनावों के मद्देनजर आरक्षण निर्धारण और प्रशासनिक रूपरेखा तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में आरक्षण की रूपरेखा राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं का ढांचा त्रिस्तरीय होता है—जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत। इन सभी स्तरों पर विभिन्न पदों के लिए नियमानुसार आरक्षण का निर्धारण किया जाता है:
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जिला स्तर: जिला परिषद सदस्यों और जिला प्रमुख के पदों के लिए रोस्टर के अनुसार आरक्षण प्रक्रिया पूरी की जाती है।
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उपखंड व ब्लॉक स्तर: पंचायत समिति सदस्यों और प्रधान पदों के लिए आरक्षण आवंटन किया जाता है।
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ग्राम पंचायत स्तर: सरपंच और वार्ड पंच के पदों के लिए उपखंड अधिकारियों की निगरानी में आरक्षण लॉटरी का आयोजन किया जाता है।
प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध कार्ययोजना विभागीय निर्देशों के तहत सभी जिला कलेक्टरों और उपखंड अधिकारियों को चुनावी प्रक्रियाओं और आरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को तय समयसीमा के भीतर निष्पादित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य चुनाव से जुड़ी सभी बुनियादी औपचारिकताएं समय पर पूरी करना है ताकि निर्वाचन का आयोजन सुगम और पारदर्शी तरीके से हो सके।
सत्यापित जानकारी एवं अधिसूचनाएं विभिन्न श्रेणियों के आरक्षण, वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े विस्तृत परिपत्र समय-समय पर विभागीय स्तर पर जारी किए जाते हैं। आम नागरिक एवं चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार संबंधित जिले के निर्वाचन कार्यालय तथा राज्य निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध आधिकारिक घोषणाओं के माध्यम से सत्यापित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।