देशभर की न्यायिक सेवाओं से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के जजों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की मांग पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और देश के सभी हाईकोर्ट्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला पूरे देश की न्यायिक व्यवस्था को प्रभावित करता है, इसलिए अंतिम फैसला लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों को सुनना आवश्यक है।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया कि जब तक इस मामले का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक याचिकाकर्ताओं को 61 वर्ष की आयु पूरी होने तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाए, बशर्ते उन्हें पहले ही सेवा से सेवानिवृत्त न किया गया हो।
22 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को तय की है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस याचिका को इसी विषय से जुड़े एक अन्य लंबित मामले के साथ जोड़ा जाए, ताकि सभी पहलुओं पर एक साथ विचार किया जा सके।
सभी राज्यों और हाईकोर्ट्स से मांगा जवाब
ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और देश के सभी हाईकोर्ट्स को नोटिस जारी किया है। साथ ही जिला, राज्य और अधीनस्थ न्यायालयों से जुड़े सभी पक्षों को भी नोटिस भेजे गए हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की न्यायिक सेवाओं को प्रभावित करता है। इसलिए सभी संबंधित पक्षों का पक्ष सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश?
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जोयमाल्या बागची, जस्टिस वी. मोहना और पीठ के अन्य सदस्य ने अपने आदेश में कहा कि जिन याचिकाकर्ताओं की सेवा जारी है और जिन्हें अभी तक सेवानिवृत्त नहीं किया गया है, उन्हें 61 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने दिया जाए। यह व्यवस्था केवल अंतरिम राहत के रूप में लागू रहेगी, जब तक अदालत इस मामले में अंतिम फैसला नहीं सुना देती।
वर्तमान में क्या है नियम?
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार राजस्थान सहित देश के अधिकांश राज्यों में जिला एवं सत्र न्यायालयों तथा अन्य अधीनस्थ अदालतों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद संबंधित याचिकाकर्ता फिलहाल 61 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रख सकेंगे।
अब सभी की नजर 22 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां केंद्र, राज्य सरकारों और हाईकोर्ट्स के जवाब के आधार पर सुप्रीम कोर्ट इस महत्वपूर्ण मामले में आगे की सुनवाई करेगा।