उदयपुर | जिले की वल्लभनगर तहसील के माल की टूस पंचायत स्थित फलेट गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की जर्जर हालत बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। स्कूल भवन इतना खस्ताहाल हो चुका है कि उसकी छत कभी भी गिर सकती है। संभावित हादसे को देखते हुए स्कूल स्टाफ ने जर्जर कमरों और बरामदों के सामने कांटेदार झाड़ियां बिछा दी हैं, ताकि कोई बच्चा गलती से भी उस हिस्से में प्रवेश न कर सके।

स्कूल में करीब 60 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि यहां चार सदस्यीय स्टाफ कार्यरत है। भवन की खराब स्थिति के कारण पूरे स्कूल की पढ़ाई केवल दो सुरक्षित कमरों में संचालित की जा रही है। इनमें कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को एक कमरे में और कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को दूसरे कमरे में पढ़ाया जा रहा है।

छत से झड़ चुका प्लास्टर, सरिए भी हो चुके हैं जंगग्रस्त

स्कूल के शिक्षक देवेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि जर्जर कमरों और बरामदों की छत से प्लास्टर पूरी तरह झड़ चुका है। छत में लगे लोहे के सरिए जंग लगने से कमजोर हो गए हैं। बारिश के मौसम में छत गिरने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। इसी वजह से बच्चों को पहले ही उस हिस्से में जाने से मना कर दिया गया है और सुरक्षा के लिए कांटेदार झाड़ियां लगाई गई हैं।

उन्होंने बताया कि स्कूल की छुट्टी के बाद भी कई बच्चे खेलने के लिए परिसर में आ जाते हैं। उस समय उन्हें रोकने वाला कोई नहीं होता, इसलिए यह व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई है।

कई बार अधिकारियों को दी जानकारी, नहीं हुई सुनवाई

शिक्षक ने बताया कि स्कूल भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक भवन की मरम्मत या नए भवन के निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे स्कूल स्टाफ और अभिभावकों में लगातार चिंता बनी हुई है।

एनएसयूआई ने उठाए सवाल

वल्लभनगर निवासी और एनएसयूआई जिला देहात सचिव पूरण कुमार मेघवाल ने कहा कि ऐसा लगता है मानो प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा हो। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले भी जर्जर स्कूल भवन गिरने से बच्चों की मौत की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में सरकार और शिक्षा विभाग को मानसून शुरू होने से पहले सभी जर्जर स्कूल भवनों का सर्वे कर आवश्यक मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।

अभिभावकों में बढ़ी चिंता

बारिश के मौसम में जर्जर भवन के कारण अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्कूल भवन की मरम्मत या नए भवन की व्यवस्था नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।