काबुल/इस्लामाबाद, 17 मार्च 2026: पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच चल रहे तनाव ने एक बार फिर खूनी रूप ले लिया। सोमवार रात पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के ओमिद (उम्मीद) ड्रग एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर एयरस्ट्राइक की, जिसमें तालिबान सरकार के अनुसार कम से कम 400 लोगों की मौत हो गई और 250 से ज्यादा घायल हुए। 2000 बेड वाले इस सरकारी अस्पताल में ड्रग एडिक्ट्स का इलाज हो रहा था। हमले से अस्पताल का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया, आग लग गई और मलबे में कई शव दबे हुए हैं।

इस दर्दनाक घटना पर अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के स्टार स्पिनर और पूर्व कप्तान राशिद खान का भावुक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। राशिद ने X पर लिखा, “मैं काबुल में पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के कारण नागरिकों की मौत की खबर से बेहद दुखी हूं। नागरिक घरों, शैक्षणिक संस्थानों या चिकित्सा सुविधाओं को निशाना बनाना – चाहे जानबूझकर हो या गलती से – यह वॉर क्राइम है। मानव जीवन की इतनी उपेक्षा, खासकर पवित्र रमजान के महीने में, बेहद चिंताजनक और बीमार करने वाली है। इससे समाज में नफरत और विभाजन बढ़ेगा।” राशिद ने आगे कहा कि “मैं अपने लोगों के साथ खड़ा हूं” और इस हमले को “अनुचित और अमानवीय” बताया।

राशिद खान का यह बयान सिर्फ एक क्रिकेटर का नहीं, बल्कि पूरे अफगानिस्तान के दर्द को व्यक्त करता है। उनके साथ अन्य अफगान खिलाड़ी मोहम्मद नबी, नवीन-उल-हक और इब्राहिम जादरान ने भी पाकिस्तान की निंदा की। नवीन-उल-हक ने पाकिस्तान की तुलना इजरायल से की और लिखा, “काबुल में उम्मीद बुझ गई। युवक इलाज कराने गए थे, पाकिस्तानी सैन्य रेजीम के बम से उनकी हत्या हो गई। मांएं गेट पर बेटों का नाम पुकार रही थीं। रमजान की 28वीं रात उनके जीवन छीन लिए गए।” मोहम्मद नबी ने भी इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” बताया।

तालिबान सरकार के डिप्टी स्पोक्सपर्सन हमदुल्लाह फिरत ने हमले को “मानवता के खिलाफ अपराध” करार दिया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि हमला पांच जगहों पर हुआ, जिसमें अस्पताल मुख्य लक्ष्य था। पाकिस्तान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पाकिस्तानी सूचना मंत्रालय ने कहा कि हमले सैन्य ठिकानों, टीटीपी (पाकिस्तानी तालिबान) और आईएसआईएस-खोरासान के गोला-बारूद भंडार पर थे। “कोई सिविलियन नुकसान नहीं हुआ। अफगानिस्तान टीटीपी को शरण दे रहा है, जिससे पाकिस्तान में हमले हो रहे हैं।” पाकिस्तान का दावा है कि यह “ऑपरेशन गजब लिल हक” का हिस्सा है और कोलैटरल डैमेज से बचा गया।

यह हमला 2026 के पाकिस्तान-अफगानिस्तान युद्ध की नई कड़ी है। फरवरी से दोनों देशों के बीच सीमा पर गोलीबारी, ड्रोन और एयरस्ट्राइक जारी हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान टीटीपी को पनाह दे रहा है, जबकि अफगानिस्तान इसे पाकिस्तान की आंतरिक समस्या बताता है। संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने अस्पताल जैसे सिविलियन टारगेट पर हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और दोनों पक्षों से डी-एस्केलेशन की अपील की। चीन ने भी बातचीत का आग्रह किया है।

राशिद खान का बयान क्रिकेट जगत में भी चर्चा का विषय बन गया। भारत सहित दुनिया भर के क्रिकेट फैंस ने उनके संदेश का समर्थन किया। राशिद वर्तमान में अफगानिस्तान के T20I कप्तान हैं और हाल ही में टी-20 वर्ल्ड कप में कमाल दिखाया था। उनका यह स्टैंड न सिर्फ खेल से ऊपर उठकर मानवीयता का है, बल्कि लाखों अफगानों की पीड़ा को आवाज देता है।काबुल में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। एम्बुलेंसें मलबा हटा रही हैं। अस्पताल के आसपास धुआं और तबाही का मंजर है। यह घटना रमजान के पवित्र महीने में हुई, जिसने दर्द को और बढ़ा दिया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब सीजफायर और जांच की मांग कर रहा है।

राशिद खान का दर्द भरा बयान एक बार फिर साबित करता है कि खेल और राजनीति अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है। अफगानिस्तान में नागरिकों की मौत पर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष अगर नहीं रुका तो यह पूरे दक्षिण एशिया को अस्थिर कर सकता है। फिलहाल राशिद खान जैसे खिलाड़ी अपनी आवाज से शांति का संदेश दे रहे हैं, लेकिन सच्चाई का पता लगाने और न्याय सुनिश्चित करने की जरूरत है।