पश्चिमी राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूणी नदियों में प्रदूषण को लेकर चल रहे अहम मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में जस्टिस (सेवानिवृत्त) संगीतजी लोढ़ा की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट पेश की गई। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को होगी।यह मामला मूल रूप से जोधपुर, पाली और बालोतरा के औद्योगिक क्षेत्रों—खासकर टेक्सटाइल व डाईंग यूनिट्स—से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट के कारण नदियों में बढ़ते प्रदूषण से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे लगभग 20 लाख लोगों के जीवन और पेयजल स्रोतों से जुड़ा गंभीर विषय माना था।
जस्टिस लोढ़ा कमेटी की रिपोर्ट में क्या प्रमुख बिंदु? रिपोर्ट में निम्न तकनीकी और प्रशासनिक सुझाव सामने आए हैं—
1️⃣ Zero Liquid Discharge (ZLD) सख्ती से लागू
औद्योगिक इकाइयों को बिना ट्रीटमेंट के एक बूंद भी पानी बाहर छोड़ने की अनुमति नहीं। सभी यूनिट्स में ZLD सिस्टम अनिवार्य रूप से क्रियान्वित करने की सिफारिश।
2️⃣ CETP (Common Effluent Treatment Plant) अपग्रेड
पाली और बालोतरा क्षेत्र के CETP की क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक जोड़ने और नियमित ऑडिट की सिफारिश। कई जगह प्लांट क्षमता से अधिक लोड लेने की बात रिपोर्ट में सामने आई।
3️⃣ Real-Time Monitoring System
हर बड़ी औद्योगिक इकाई में ऑनलाइन रियल-टाइम एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने और उसे सीधे राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जोड़ने का सुझाव।
4️⃣ अवैध डिस्चार्ज पर भारी जुर्माना
जो इकाइयाँ रात के समय या गुप्त रूप से untreated पानी छोड़ती पाई जाएँ, उन पर भारी आर्थिक दंड और लाइसेंस निरस्तीकरण की सिफारिश।
5️⃣ भूजल और मिट्टी की रिमेडिएशन
प्रदूषित क्षेत्रों में भूजल शुद्धिकरण (Remediation) और मिट्टी परीक्षण की विशेष योजना लागू करने का सुझाव, ताकि किसानों और ग्रामीणों को सुरक्षित पानी मिल सके।
6️⃣ प्रशासनिक जवाबदेही तय
स्थानीय प्रशासन, नगर निकाय और उद्योग विभाग की जिम्मेदारी तय करने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने पहले भी स्पष्ट किया था कि पर्यावरण से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि उद्योग विकास के नाम पर आमजन के स्वास्थ्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता।अब 10 अप्रैल 2026 की सुनवाई में यह तय हो सकता है कि— किन उद्योगों पर त्वरित कार्रवाई होगी, कितनी समयसीमा में सुधार लागू होगा और क्या किसी अधिकारी या उद्योग पर दंडात्मक कार्रवाई होगी
स्थानीय प्रभाव
किसानों की फसलों पर असर,ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पेयजल की समस्या,घरों में दरारें व पर्यावरणीय क्षति,उद्योगों पर संभावित आर्थिक दबाव,यह मामला पूरे पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक भविष्य और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़ा हुआ है।