उत्तर प्रदेश के मेरठ में युवती और उसके पिता की हत्या से जुड़े चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सागर को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले को बेहद गंभीर बताया।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील की दलीलें सुनीं, लेकिन अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों का जिक्र करते हुए कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आरोपी ने न केवल युवती की हत्या की, बल्कि उसके पिता की भी जान ले ली और उसका भाई भी गंभीर रूप से घायल हुआ।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर आरोपों वाले मामले में आरोपी को राहत देना उचित नहीं होगा। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश की टिप्पणी भी चर्चा का विषय बन गई।
एकतरफा प्यार से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला जून 2020 का है। पुलिस में दर्ज एफआईआर के अनुसार आरोपी सागर युवती से एकतरफा प्रेम करता था और लगातार उसका पीछा करता था।
युवती के भाई द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया था कि परिवार ने युवती की शादी किसी अन्य युवक के साथ तय कर दी थी। इस बात से आरोपी नाराज था और लगातार युवती पर दबाव बना रहा था।
शादी तय होने के बाद बढ़ा विवाद
एफआईआर के अनुसार जब आरोपी को युवती की शादी तय होने की जानकारी मिली तो वह बौखला गया। इसके बाद उसने कथित तौर पर युवती और उसके परिवार को निशाना बनाया।
घटना के दौरान हुई गोलीबारी में युवती और उसके पिता की मौत हो गई, जबकि उसका भाई घायल हो गया। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था।
कोर्ट ने माना गंभीर अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह मामला सामान्य आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि इसमें एक ही परिवार के दो लोगों की जान गई है और एक अन्य सदस्य घायल हुआ है। ऐसे में आरोपी को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी और आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में रहेगा।
मामला बना था राष्ट्रीय चर्चा का विषय
मेरठ का यह हत्याकांड उस समय काफी चर्चाओं में रहा था। एकतरफा प्रेम, पीछा करने और शादी तय होने के बाद हुए हिंसक हमले ने कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े किए थे।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद आरोपी को फिलहाल कोई कानूनी राहत नहीं मिली है।