मानसून के मौसम में भारत के कई बड़े शहरों में सीजनल इन्फ्लूएंजा A(H1N1), जिसे आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू (Swine Flu) कहा जाता है, का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली और कर्नाटक समेत देश के कई राज्यों में मरीजों की संख्या हजारों का आंकड़ा पार कर चुकी है। अस्पतालों में बढ़ती भीड़ ने लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने एक राहत भरी जानकारी साझा की है।
ICMR ने साफ की स्थिति: नहीं आया कोई नया या खतरनाक म्यूटेंट
तेजी से फैलते संक्रमण को देखते हुए यह अफवाह उड़ रही थी कि शायद वायरस का कोई नया रूप सामने आ गया है। लेकिन, स्वास्थ्य मंत्रालय और ICMR ने स्पष्ट किया है कि भारत में H1N1 का कोई नया या खतरनाक म्यूटेंट स्ट्रेन नहीं मिला है।
वर्तमान में जो वायरस लोगों को संक्रमित कर रहा है, वह A/Missouri/11/2025 (H1N1) pdm09 जैसा ही स्ट्रेन है, जो क्लेड 6B.1A.5a2a और सब-क्लेड D.3.1.1 से जुड़ा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वही स्ट्रेन है जो 2025 से लगातार सर्कुलेशन में है। इसलिए जनता को पैनिक (घबराने) करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।
दिल्ली और कर्नाटक में सबसे ज्यादा असर, जानें क्या कहते हैं आंकड़े
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) और स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के कुछ राज्यों में स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है:
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दिल्ली: राजधानी में इस साल अब तक H1N1 के 1,777 कन्फर्म मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में 20 अगस्त को एक ही दिन में 114 नए मरीज दर्ज किए गए।
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कर्नाटक: राज्य में स्वाइन फ्लू के मामले 4,000 के पार पहुंच गए हैं, जिनमें से 50% से अधिक मामले अकेले बेंगलुरु शहर से हैं।
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अन्य राज्य: मुंबई, चेन्नई और केरल के कई हिस्सों में भी संक्रमण की रफ्तार तेज देखी जा रही है।
पिछले वर्षों का NCDC डेटा: महामारी के बाद 2021 में स्वाइन फ्लू का असर कम (778 मामले) था, लेकिन 2022 में यह तेजी से बढ़कर 13,202 (410 मौतें) हो गया। 2023 और 2024 में भी मामले लगातार हजारों में रहे हैं। 2025 की NCDC रिपोर्ट भी यही दर्शाती है कि यह वायरस लगातार कई राज्यों में सक्रिय है।
क्या वैक्सीन है असरदार?
NCDC के अनुसार, 2025–26 सीजन के दौरान भारत में फैलने वाला H1N1 वायरस वर्तमान में उपलब्ध इन्फ्लूएंजा वैक्सीन के घटकों से पूरी तरह मेल खाता है। इसका मतलब है कि यह वैक्सीन स्वाइन फ्लू के खिलाफ अत्यधिक कारगर है। यह टीका मुख्य रूप से तीन स्ट्रेन (H1N1, H3N2, और B/Victoria) से सुरक्षा प्रदान करता है।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण और रिस्क फैक्टर
सीजनल इन्फ्लूएंजा (H1N1) आमतौर पर अपने आप ठीक होने वाला संक्रमण है। इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
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तेज बुखार और कफ वाली खांसी
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भयंकर सिरदर्द और बदन दर्द
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गले में खराश और थकान
ज्यादातर मरीज सही देखभाल और आराम से रिकवर कर जाते हैं। लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारियों (शुगर, हार्ट या किडनी की बीमारी) से जूझ रहे लोगों को इस वायरस से सबसे ज्यादा खतरा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह है कि अगर लक्षण बिगड़ें या सांस लेने में तकलीफ हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
H1N1 से बचाव के 10 जरूरी नियम
डिजिटल दौर में सही जानकारी ही बचाव है। खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए इन नियमों का पालन करें:
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मास्क का प्रयोग करें: भीड़भाड़ वाली जगहों और बंद कमरों में मास्क जरूर पहनें, जिससे एरोसोल या ड्रॉपलेट्स से बचा जा सके।
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छींकते-खांसते समय सावधानी: खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू से ढकें। टिश्यू न होने पर अपनी कोहनी के अंदरूनी हिस्से का इस्तेमाल करें।
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हाथों की सफाई: खांसने, छींकने या बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
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चेहरे को न छुएं: गंदे हाथों से आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
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मरीज को आइसोलेट करें: अगर घर में किसी को स्वाइन फ्लू की पुष्टि होती है, तो उसे अन्य सदस्यों से अलग कमरे में रखें।
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खुद डॉक्टर न बनें: बीमारी के लक्षण दिखने पर बिना डॉक्टरी सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाइयां (सेल्फ-मेडिकेशन) न लें।
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बीमार हैं तो घर पर रहें: बुखार या लक्षण होने पर ऑफिस, स्कूल या सार्वजनिक जगहों पर जाने से बचें।
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हाइड्रेटेड रहें: बुखार के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें। पानी, जूस या सूप का सेवन करते रहें।
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टिश्यू का सुरक्षित निपटान: इस्तेमाल किए गए नैपकिन या टिश्यू को इधर-उधर न फेंकें, उन्हें कूड़ेदान में सही से डिस्पोज करें और दोबारा इस्तेमाल न करें।
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हाथ मिलाने से बचें: संक्रमण फैलने से रोकने के लिए अभिवादन के लिए हाथ मिलाने (Handshake) के बजाय नमस्ते का विकल्प चुनें।