“जिस मंदिर में हर रोज शांति, भक्ति और आरती की गूंज सुनाई देती है… उसी मंदिर के बाहर शनिवार रात अचानक चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। आरती खत्म होते ही 35 साल के पुजारी पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया। सवाल ये है कि जब पुजारी ने पहले ही जान के खतरे की शिकायत पुलिस को दे दी थी… तो फिर ये हमला कैसे हो गया?” राजस्थान के बांसवाड़ा शहर के आजाद चौक स्थित भैरवजी मंदिर में शनिवार रात सनसनीखेज घटना सामने आई। मंदिर के 35 वर्षीय पुजारी दीपक व्यास पर कुछ लोगों ने आरती के बाद बाहर निकलते ही हमला कर दिया। घायल पुजारी दीपक पुत्र नारायणलाल व्यास, निवासी कल्याण कॉलोनी, ने बताया कि वे शनिवार रात मंदिर में पूजा और आरती संपन्न कर बाहर निकले ही थे कि पहले से मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और अचानक लाठी-डंडों से हमला शुरू कर दिया।  हमलावरों ने उनके हाथ और पैरों पर ताबड़तोड़ वार किए। मौके पर मौजूद लोगों ने शोर मचाया और पुलिस को सूचना दी। शोर सुनते ही आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायल पुजारी को तुरंत एमजी हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि दीपक व्यास ने इसी दिन पहले कोतवाली थाने में लिखित रिपोर्ट देकर अपनी जान को खतरा बताया था। इसके बावजूद रात में उन पर हमला हो गया। कोतवाली थानाधिकारी बुधाराम बिश्नोई के मुताबिक, सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपियों की तलाश शुरू की गई। हालांकि आरोपी अपने ठिकानों पर नहीं मिले, लेकिन पुलिस ने उन्हें चिन्हित कर लिया है और जल्द गिरफ्तारी का दावा किया है। फिलहाल पुलिस हमले के कारणों की जांच में जुटी है। अब बड़ा सवाल यही है—क्या पहले दी गई शिकायत पर समय रहते कार्रवाई होती तो ये हमला टल सकता था?