भारत के विकास की नींव में इंजीनियरिंग का अहम योगदान रहा है और इसी योगदान को सलाम करने के लिए देश में हर साल 15 सितंबर को 'इंजीनियर्स डे' (Engineers' Day) मनाया जाता है। यह दिन महान इंजीनियर, प्रशासक और 'भारत रत्न' से सम्मानित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने साबित किया था कि तकनीक सिर्फ निर्माण का साधन नहीं, बल्कि देश के सामाजिक और आर्थिक विकास की चाबी है।
जल प्रबंधन से लेकर उद्योग तक: विश्वेश्वरैया की दूरदर्शी सोच
15 सितंबर 1861 को जन्मे सर एम. विश्वेश्वरैया ने उस दौर में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखी, जब भारत में तकनीक शुरुआती चरण में थी।
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अहम योगदान: पुणे के खड़कवासला जलाशय में स्वचालित जल-गेट प्रणाली (1903), कृष्णराज सागर बांध का निर्माण, हैदराबाद की बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था और विशाखापत्तनम बंदरगाह को बचाना उनके प्रमुख प्रोजेक्ट्स में शामिल हैं।
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संस्थागत विकास: 1912 से 1918 तक मैसूर के दीवान रहते हुए उन्होंने भद्रावती आयरन एंड स्टील प्लांट, मैसूर साबुन फैक्ट्री और स्टेट बैंक ऑफ मैसूर की स्थापना कर औद्योगिक क्रांति को बढ़ावा दिया।
ईंट-गारे से आगे निकला इंजीनियरिंग का दायरा
आज का इंजीनियर सिर्फ पुल या इमारतें नहीं बना रहा है। आज इंजीनियरिंग का मतलब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, स्पेस टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग हो गया है। आंकड़े बताते हैं कि भारत आज दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत चिप डिजाइन इंजीनियरों का घर है। इतना ही नहीं, 'स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स 2024' (Stanford AI Index 2024) के अनुसार, भारत AI स्किल पेनिट्रेशन के मामले में पूरी दुनिया में पहले स्थान पर है।
भविष्य की चुनौतियां: क्या सिर्फ निर्माण ही काफी है?
आज सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि “क्या बनाया जा सकता है?”, बल्कि यह है कि “क्या बनाया जाना चाहिए और उसका समाज पर क्या असर होगा?” बढ़ते शहर, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों के बीच, किसी भी प्रोजेक्ट की गुणवत्ता, सुरक्षा और उसका पर्यावरण के अनुकूल (Sustainable) होना बेहद जरूरी हो गया है।
AI और क्वांटम तकनीक के दौर में इंजीनियर की भूमिका
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने डिजाइन और डेटा एनालिसिस के काम को ऑटोमेट कर दिया है, लेकिन इससे इंजीनियरों की भूमिका खत्म नहीं हुई है। मानवीय समझ, नैतिकता और सुरक्षा पैमानों को तय करने के लिए इंसानी दिमाग की जरूरत हमेशा रहेगी। भारत का 'नेशनल क्वांटम मिशन' (National Quantum Mission) भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका लक्ष्य 2031 तक 1000 फिजिकल क्यूबिट वाले क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना है।
राष्ट्रनिर्माण और इंजीनियर्स डे का असली संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सर एम. विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि देते हुए 'विकसित भारत' के निर्माण में इंजीनियरों की भूमिका को सबसे अहम बताया है। विश्वेश्वरैया की विरासत हमें सिखाती है कि तकनीक की सार्थकता तभी है, जब वह आम इंसान के काम आए।
आज के दिन हमें खुद से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए— क्या हमारी आज की इंजीनियरिंग, आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, टिकाऊ और बेहतर भारत का निर्माण कर रही है?