राजस्थान के भरतपुर जिले से पुलिस महकमे को शर्मसार कर देने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ रक्षक ही भक्षक बन बैठे। जिन पुलिसकर्मियों पर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उन्होंने एक 16 वर्षीय नाबालिग को महज इसलिए बेरहमी से पीटा और अवैध हथियार प्लांट कर झूठे केस में फंसा दिया क्योंकि उसने उन्हें 'हफ्ता' (अवैध वसूली) देना बंद कर दिया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिस थाने में ये सातों पुलिसकर्मी तैनात हैं, उसी थाने में उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।

रेंटल कार के व्यापार से शुरू हुई वसूली

पीड़ित नाबालिग की बुआ ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि बच्चे के जन्म से 12 दिन पहले ही उसके पिता का निधन हो गया था। जन्म के बाद से ही वह भरतपुर में अपनी बुआ के पास रहकर पढ़ाई कर रहा है।

दिसंबर के महीने में नाबालिग ने अपना 'रेंटल कार' (Rental Car) का एक छोटा सा बिजनेस शुरू किया था। आरोप है कि व्यापार शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद डीएसटी (DST) टीम का कांस्टेबल दशरथ उसके ऑफिस पहुंचा और हर महीने 10 हजार रुपये 'हफ्ते' की मांग की। पुलिसकर्मी ने धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए तो वह उसका व्यापार नहीं चलने देगा। खौफजदा नाबालिग ने तीन महीने तक लगातार 10-10 हजार (कुल 30 हजार रुपये) कांस्टेबल को दिए। बाद में व्यापार में घाटा होने पर नाबालिग ने काम बंद कर दिया, लेकिन कांस्टेबल दशरथ की पैसों की डिमांड जारी रही। पैसे देने से मना करने पर उसने झूठे केस में फंसाने की धमकी दी थी।

खाटूश्याम से लौटते वक्त बीच रास्ते से उठाया

शिकायत के मुताबिक, बीते 19 अगस्त को नाबालिग अपने कुछ दोस्तों के साथ खाटूश्याम जी के दर्शन करने गया था। 21 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे जब वह वापस लौट रहा था, तभी रास्ते में उसकी कार पंचर हो गई। वह कार खड़ी करके चाय पीने लगा। इसी दौरान खुद को DST टीम का सदस्य बताने वाले अंकित और मानवीर वहां पहुंचे और कांस्टेबल दशरथ के नाम पर उसे जबरन DST ऑफिस ले गए।

DST ऑफिस में थर्ड डिग्री टॉर्चर और रची गई साजिश

आरोप है कि DST ऑफिस में कांस्टेबल दशरथ, हरिओम और उनकी टीम ने नाबालिग के साथ हैवानियत की हदें पार कर दीं। उसे पट्टों और लात-घूंसों से बुरी तरह पीटा गया और पुलिसकर्मी उसके पैरों के ऊपर खड़े हो गए।

साजिश यहीं खत्म नहीं हुई। आरोप है कि इसके बाद बाहर से एक 'देसी कट्टा' मंगवाया गया। शाम करीब 5 बजे ASI शिवलाल और दो अन्य कांस्टेबल नाबालिग के मुंह पर कपड़ा बांधकर उसे एक सुनसान जगह पर ले गए। वहां कांस्टेबल अनिल ने नाबालिग की पैंट में देसी कट्टा फंसा दिया और गोली मारने की धमकी देते हुए उसका वीडियो बनाया। इसके बाद पुलिस ने झूठी तलाशी दिखाते हुए उसके पास से अवैध हथियार बरामद होने का दावा किया और उस पर 'आर्म्स एक्ट' (Arms Act) के तहत झूठा मुकदमा थोप दिया।

जमानत के बाद सामने आई सच्चाई, इन 7 पुलिसकर्मियों पर हुई FIR

घटना के बाद परिजनों ने जैसे-तैसे थाने पहुंचकर नाबालिग की जमानत करवाई। जब वह बाहर आया, तो उसके शरीर पर गंभीर चोटों और मारपीट के गहरे निशान मौजूद थे। पूरी आपबीती सुनने के बाद परिजनों ने आला अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया।

मामले में संज्ञान लेते हुए अब आरोपी DST कांस्टेबल दशरथ, हरिओम, अनिल, अंकित, मानवीर, ASI शिवलाल और हेड कांस्टेबल अनिल कुमार सहित कुल 7 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने इस पूरे प्रकरण की विभागीय और कानूनी जांच शुरू कर दी है।

इस घटना ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और DST टीम के काम करने के तरीकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि इन आरोपी पुलिसकर्मियों पर आगे क्या ठोस कार्रवाई की जाती है।