राजस्थान के अलवर जिले से एक बेहद दर्दनाक और आंखें नम कर देने वाली खबर सामने आ रही है। करीब साढ़े सात महीने पहले एक तेज रफ्तार थार गाड़ी की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हुई 4 साल की मासूम बच्ची खुशबू ने गुरुवार रात को दम तोड़ दिया। खुशबू पिछले साढ़े सात महीने से बिस्तर पर थी और जिंदगी की जंग लड़ रही थी। इस खौफनाक हादसे ने पहले ही उसके माता-पिता और भाई समेत परिवार के चार लोगों की जान ले ली थी। खुशबू के निधन के साथ ही इस हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या अब पांच हो गई है।

अचानक तेज चली सांसें और टूट गई आस

पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार रात करीब 9 बजे नांगल खेड़ा स्थित घर पर मासूम खुशबू की सांसें अचानक तेज चलने लगीं। हालत बिगड़ती देख परिजन आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद मासूम को मृत घोषित कर दिया।

परिजनों ने बताया कि 2 नवंबर 2025 को हुए उस भीषण हादसे के बाद खुशबू लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) हो गई थी। जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में करीब एक महीने तक चले सघन इलाज के बाद उसे घर लाया गया था। उसे हर महीने जयपुर चेकअप के लिए ले जाया जाता था और घर पर ही दवाइयां दी जा रही थीं, लेकिन अंततः उसे बचाया नहीं जा सका।

थार की छत पर 500 मीटर दूर मिली थी मासूम

यह रूह कंपा देने वाला हादसा 2 नवंबर 2025 की शाम करीब 7:30 बजे अलवर के सदर थाना क्षेत्र में छठी मील के पास हुआ था। नांगल खेड़ा निवासी महेंद्र (35) अपनी बाइक पर पत्नी गुड्डी (35), बेटे पूर्वांश (2), भतीजी पायल (8) और बेटी खुशबू (4) को लेकर सड़क पार कर रहे थे। इसी दौरान एक बेहद तेज रफ्तार थार गाड़ी ने उन्हें बेरहमी से टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भयावह थी कि महेंद्र उछलकर घटनास्थल से 200 मीटर दूर और पत्नी गुड्डी 100 मीटर दूर जा गिरीं। मासूम पूर्वांश और पायल के शव भी 100 मीटर के दायरे में सड़क पर बिखर गए। इन चारों की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं, 4 साल की खुशबू टक्कर के बाद हवा में उछलकर भागती हुई थार गाड़ी की छत पर जा गिरी थी और आरोपी ड्राइवर की लापरवाही के कारण घायल अवस्था में ही करीब 500 मीटर दूर थार की छत पर मिली थी। हादसा करने के बाद ड्राइवर गाड़ी छोड़कर खेतों के रास्ते फरार हो गया था।

अनाथ हो गईं तीन बेटियां, नहीं मिली कोई सरकारी मदद

मृतक महेंद्र के परिवार में अब केवल तीन बेटियां—मोनिका (16), रेनू (14) और खुशी (11) ही बची हैं। इन तीनों बच्चियों के सिर से माता-पिता और इकलौते भाई का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। परिवार के सदस्य करण सिंह ने अत्यंत दुख व्यक्त करते हुए बताया कि हादसे में अब तक परिवार के 5 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन प्रशासन और सरकार की ओर से अभी तक इन अनाथ बच्चियों के भविष्य के लिए कोई ठोस सहायता या आश्वासन नहीं मिला है। पूरा परिवार इन बच्चियों के पालन-पोषण को लेकर बेहद चिंतित है। इस दर्दनाक हादसे के अंत ने पूरे क्षेत्र को एक बार फिर झकझोर कर रख दिया है।