नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और शांति समझौते से जुड़ी खबरों के बीच सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश में कीमती धातुओं की ओर रुख कर रहे हैं, जिसके चलते घरेलू वायदा बाजार में भी सोना और चांदी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार के कारोबार में सोने और चांदी दोनों में मजबूती दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक घटनाक्रमों का सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। एक ओर जहां अंतरराष्ट्रीय तनाव सोने को सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) के रूप में मजबूत समर्थन दे रहा है, वहीं दूसरी ओर संभावित शांति समझौतों और डॉलर की चाल के कारण कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है तो सोने की मांग और कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं यदि शांति वार्ताएं सफल होती हैं और निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान बढ़ता है, तो सोने और चांदी पर दबाव भी बन सकता है।
चांदी की कीमतों को औद्योगिक मांग से भी समर्थन मिल रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर पैनलों और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में बढ़ती खपत के कारण चांदी की दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी हुई है। यही वजह है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद चांदी निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनी हुई है।
आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, डॉलर इंडेक्स की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाओं पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। इन कारकों के आधार पर सोना और चांदी आगे की दिशा तय कर सकते हैं।
निवेश सलाहकारों का कहना है कि मौजूदा अस्थिर माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और लंबी अवधि की रणनीति के साथ बाजार पर नजर रखनी चाहिए। कीमती धातुएं अभी भी पोर्टफोलियो में जोखिम संतुलित करने का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जा रही हैं।