नगरीय निकाय चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने और वोटर्स की सुविधा के लिए निर्वाचन विभाग ने एक अहम फैसला लिया है। मतदान के दिन मतदाताओं को अपना सही बूथ खोजने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए हर मतदान भवन पर 'वोटर सहायता केंद्र' (Voter Assistance Booth) स्थापित किए जाएंगे।

अक्सर देखा गया है कि एक ही स्कूल या पंचायत भवन में कई मतदान केंद्र होने की वजह से मतदाता भ्रमित हो जाते हैं। इसी असमंजस को दूर करने और मतदान प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए यह कवायद शुरू की गई है।

BLO स्तर के कर्मचारी करेंगे मदद

मतदाताओं की सहायता के लिए इन केंद्रों पर बीएलओ (BLO - Booth Level Officer) स्तर के प्रशिक्षित कार्मिकों को तैनात किया जाएगा। ये कर्मचारी अपने पास मौजूद अद्यतन मतदाता सूची के जरिए मतदाताओं को उनका सही मतदाता क्रमांक (Voter Serial Number) और सटीक बूथ नंबर बताएंगे, ताकि वे सीधे अपने निर्धारित कमरे में जाकर वोट डाल सकें।

सहायकों की तैनाती का यह रहेगा फॉर्मूला:

प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और बूथों की संख्या के आधार पर सहायकों की ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए हैं:

  • 5 बूथ तक: जिन मतदान भवनों में 5 तक मतदान केंद्र हैं, वहां सहायता के लिए 2 सहायक लगाए जाएंगे।

  • 5 से अधिक बूथ: 5 से ज्यादा मतदान केंद्र वाले बड़े भवनों में स्थानीय स्तर और आवश्यकता के अनुसार सहायकों की संख्या तय की जाएगी।

मिलेंगी ये बुनियादी सुविधाएं

प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मतदाता सहायता केंद्रों पर सिर्फ कर्मचारी ही नहीं होंगे, बल्कि वहां आवश्यक बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएंगी। इन केंद्रों पर टेबल, कुर्सी, छाया (टेंट) और पीने के पानी की समुचित व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही, मतदान दिवस पर इन बूथों की गतिविधियों की भी समय-समय पर जानकारी ली जाएगी।

अधिकारियों को सख्त निर्देश चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को इन निर्देशों की अक्षरशः पालना करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जा सकती है।

इस नई व्यवस्था से बुजुर्गों, महिलाओं और पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को विशेष राहत मिलेगी और मतदान केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ व कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा नहीं होगी।