अमेरिकी वायुसेना (USAF) ने भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए एक बेहद महत्वाकांक्षी रक्षा कार्यक्रम को तेज कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका लगभग 1,000 सेमी-ऑटोनॉमस (आंशिक रूप से स्वचालित) कॉम्बैट एयरक्राफ्ट विकसित और तैनात करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इन एयरक्राफ्ट्स का उद्देश्य मानव पायलट वाले फाइटर जेट्स के साथ मिलकर संयुक्त रूप से युद्ध अभियानों को अंजाम देना है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर बढ़ते सैन्य तनाव और विशेषकर पश्चिम एशिया में ईरान जैसे देशों से जुड़े सुरक्षा हालात को लेकर अमेरिका अपनी एयर पावर को और आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है।

अगली पीढ़ी की युद्ध रणनीति: मानव और AI का संयुक्त ऑपरेशन

अमेरिकी वायुसेना की योजना के तहत ये नए लड़ाकू विमान पूरी तरह मानव-नियंत्रित नहीं होंगे, बल्कि इनमें एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और “मिशन ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर” का उपयोग किया जाएगा।

इनका मुख्य उद्देश्य होगा:

खतरनाक और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में बिना पायलट के ऑपरेशन करना

मानव फाइटर जेट्स को सपोर्ट देना

दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भ्रमित करना

तेज और सटीक हमला करने की क्षमता बढ़ाना

विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक भविष्य के “मैन-मशीन टीमिंग” युद्ध का आधार बन सकती है।

दो प्रमुख कंपनियों को मिला पहला कॉन्ट्रैक्ट

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के पहले चरण में अमेरिकी वायुसेना ने दो प्रमुख रक्षा कंपनियों को उत्पादन कॉन्ट्रैक्ट दिए हैं:

General Atomics

Anduril Industries

इन कंपनियों को क्रमशः नए जनरेशन के प्रोटोटाइप फाइटर ड्रोन विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों कंपनियों ने तय समय से पहले आवश्यक तकनीकी मानकों को पूरा कर लिया है।

इन विमानों के मॉडल को FQ-42A (General Atomics) और FQ-44A (Anduril) के रूप में विकसित किया जा रहा है।

AI मिशन सिस्टम के लिए 6 बड़ी कंपनियों की भागीदारी

सिर्फ विमान निर्माण ही नहीं, बल्कि इनके संचालन के लिए जरूरी AI आधारित “मिशन ऑटोनॉमी सिस्टम” विकसित करने के लिए भी छह प्रमुख कंपनियों को शामिल किया गया है:

Anduril Industries

General Atomics

Lockheed Martin

Northrop Grumman

RTX Corporation (Collins Aerospace)

Shield AI

इन कंपनियों को AI सॉफ्टवेयर, ऑटोनॉमस निर्णय क्षमता और मिशन कंट्रोल सिस्टम विकसित करने का जिम्मा दिया गया है।

कुछ कंपनियों को अतिरिक्त उत्पादन विकल्प भी दिए गए हैं ताकि तकनीक तेजी से विकसित और तैनात की जा सके।

अमेरिका का लक्ष्य: भविष्य के युद्धों में बढ़त

अमेरिकी वायुसेना के अधिकारियों के अनुसार इस पूरे प्रोग्राम का मकसद है:

एयर कॉम्बैट में मानव पायलट की सुरक्षा बढ़ाना

दुश्मन के मुकाबले तेज निर्णय लेने की क्षमता हासिल करना

कम लागत में ज्यादा लड़ाकू क्षमता तैयार करना

“स्वार्म टेक्नोलॉजी” यानी कई ड्रोन को एक साथ नियंत्रित करना

यूएस एयर फोर्स नेतृत्व का मानना है कि आने वाले समय में युद्ध केवल मानव पायलटों पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि AI-संचालित मशीनें निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की एयर डिफेंस रणनीति में बड़ा बदलाव है। इससे:

पारंपरिक फाइटर जेट्स की भूमिका बदल सकती है

ड्रोन और AI सिस्टम युद्ध का मुख्य हिस्सा बन सकते हैं

हवाई युद्ध अधिक तेज, जटिल और तकनीक-आधारित हो जाएगा

अमेरिका का यह नया कार्यक्रम स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। 1,000 सेमी-ऑटोनॉमस फाइटर एयरक्राफ्ट और AI आधारित मिशन सिस्टम न केवल अमेरिकी वायुसेना की ताकत बढ़ाएंगे, बल्कि वैश्विक सैन्य संतुलन पर भी गहरा असर डाल सकते हैं।