भीलवाड़ा (राजस्थान):

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की पंचायत समिति हुरड़ा की ग्राम पंचायत दांतड़ा में मनरेगा योजना के तहत बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। यहां सरकारी रिकॉर्ड में 13.54 लाख रुपये की सीसी ब्लॉक सड़क का निर्माण दिखाया गया, लेकिन जब मौके पर जांच की गई तो वहां किसी भी प्रकार का सड़क निर्माण मौजूद नहीं पाया गया।

जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि काम केवल कागजों और एमआईएस पोर्टल पर ही पूरा दिखाया गया, जबकि वास्तविक रूप से जमीन पर कोई कार्य नहीं हुआ।

कैसे सामने आया मामला

यह मामला 6 अप्रैल 2026 को दर्ज शिकायत के बाद सामने आया। स्थानीय व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि पथवारी से वैष्णव समाधि तक सीसी ब्लॉक सड़क के नाम पर भुगतान उठा लिया गया है, जबकि मौके पर कोई निर्माण नहीं हुआ।

शिकायत मिलने के बाद विकास अधिकारी ने सहायक अभियंता को जांच के निर्देश दिए।

जांच में क्या मिला

सहायक अभियंता द्वारा 7 अप्रैल 2026 को मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया गया और साथ ही मनरेगा के एमआईएस पोर्टल रिकॉर्ड की भी जांच की गई।

जांच में सामने आया कि:

30 दिसंबर 2021 को लगभग 14.54 लाख रुपये की योजना स्वीकृत हुई थी

8 जनवरी 2022 से 3 मई 2023 के बीच 13.54 लाख रुपये का खर्च दिखाया गया

एमआईएस रिकॉर्ड में कार्य स्थल लक्ष्मीपुरा पथवारी क्षेत्र दिखाया गया

लेकिन मौके पर जाकर देखा गया तो वहां न कोई सीसी ब्लॉक सड़क थी, न कोई निर्माण कार्य

फोटो और जीपीएस आधारित सत्यापन में भी किसी प्रकार का विकास कार्य प्रमाणित नहीं हुआ।

सरपंच का जवाब

जांच के दौरान ग्राम पंचायत सरपंच से पूछताछ की गई तो उन्होंने दावा किया कि कार्य किसी अन्य स्थान पर कराया गया है। हालांकि जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि स्वीकृत स्थान और जियोटैग लोकेशन पर ही काम होना अनिवार्य था, जो नहीं हुआ।

कौन-कौन दोषी पाया गया

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में चार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार माना गया है:

ग्राम विकास अधिकारी (VDO)

ग्राम पंचायत सरपंच

सहायक अभियंता (AEN)

जेटीए (JTA)

रिपोर्ट में कहा गया है कि इनकी मिलीभगत से बिना काम किए भुगतान जारी किया गया।

वसूली की सिफारिश

जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि 13.54 लाख रुपये की पूरी राशि सरकारी खजाने में वापस वसूली योग्य है। अब आगे प्रशासनिक कार्रवाई और वसूली प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

यह मामला मनरेगा जैसी ग्रामीण विकास योजना में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब जिम्मेदारों पर कार्रवाई और वसूली की प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।