जयपुर/नई दिल्ली। राजस्थान के पाकिस्तान सीमा से सटे संवेदनशील जिलों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में सीमा सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों, अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर विस्तार से चर्चा होगी।
बैठक में राजस्थान के पाकिस्तान सीमा से जुड़े पांच संवेदनशील जिलों—श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और फलोदी—के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) शामिल होंगे। जिला कलेक्टर जयपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़ेंगे, जबकि संबंधित जिलों के एसपी नई दिल्ली में मौजूद रहकर बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय गृह मंत्रालय, खुफिया एजेंसियों और अन्य सुरक्षा विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहेंगे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान सीमा से लगे क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करना और भविष्य की रणनीति तैयार करना है। सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों, ड्रोन के जरिए हथियार और मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध निर्माण, घुसपैठ की आशंका तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
हाल के महीनों में सीमा क्षेत्रों में सामने आए सुरक्षा संबंधी इनपुट और विभिन्न एजेंसियों की रिपोर्ट पर भी मंथन होगा। ड्रोन गतिविधियों की निगरानी को और प्रभावी बनाने, नशे की तस्करी पर सख्ती से रोक लगाने, अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान तेज करने तथा सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष फोकस रहेगा।
बैठक में जिला प्रशासन, पुलिस और बीएसएफ के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए नई कार्ययोजना पर भी विचार किया जाएगा। सीमावर्ती इलाकों में इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने, तकनीकी निगरानी बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।
राजस्थान की करीब 1,000 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान से लगती है, इसलिए श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और फलोदी जिले राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में इस उच्चस्तरीय बैठक को सीमाई सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बैठक में लिए गए फैसलों के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा तथा ड्रोन, मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध गतिविधियों और सीमा पार से होने वाले किसी भी सुरक्षा खतरे से निपटने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा।