राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां समग्र शिक्षा अभियान (समसा) कार्यालय में सरकारी वाहनों के उपयोग को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। RTI से सामने आए दस्तावेजों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला एडीपीसी (अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक) कार्यालय से जुड़ा है, जहां आरोप है कि एक ही अधिकारी ने एक ही तारीख और लगभग एक ही समय पर दो अलग-अलग सरकारी वाहनों का उपयोग कागजों में दर्शाया। इतना ही नहीं, लॉग बुक में काटा-पीटी और ओवरराइटिंग भी सामने आई है, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।

तकनीकी शाखा की गाड़ी भी इस्तेमाल करने का आरोप

जानकारी के अनुसार एडीपीसी कार्यालय में अनुबंध पर दो वाहन लगाए गए हैं।

  • वाहन संख्या RJ-06/TA-2776 एडीपीसी कार्यालय के लिए निर्धारित है।
  • वाहन संख्या RJ-51/TA-1069 तकनीकी शाखा के लिए आरक्षित है।

RTI से प्राप्त दस्तावेजों के मुताबिक एडीपीसी कल्पना शर्मा दोनों वाहनों का उपयोग करती दिखाई गई हैं।

एक ही समय में दो गाड़ियों से यात्रा का दावा

दस्तावेजों में दर्ज विवरण के अनुसार कई तारीखों पर दोनों गाड़ियों की अलग-अलग यात्राएं दिखाई गई हैं, जबकि अधिकारी एक ही थीं।

पहला मामला: 18 सितंबर 2025

  • वाहन RJ-51/TA-1069 सुबह 7:20 बजे समसा कार्यालय से रवाना होकर भीलवाड़ा, शाहपुरा और जहाजपुर गया।
  • यह वाहन 202 किलोमीटर की यात्रा कर शाम 7:41 बजे लौटा।

उसी दिन—

  • वाहन RJ-06/TA-2776 सुबह 6:45 बजे रवाना होकर फूलिया कला स्थित महात्मा गांधी स्कूल गया।
  • इस गाड़ी ने 173 किलोमीटर की यात्रा कर शाम 7 बजे वापसी दिखाई गई।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि एक अधिकारी एक ही समय में दो अलग-अलग वाहनों में कैसे मौजूद हो सकती हैं।

दूसरा मामला: 26 सितंबर 2025

दूसरे मामले में भी दोनों वाहनों की अलग-अलग यात्राएं दर्ज की गईं।

  • गाड़ी 1069 सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक सुभाष नगर, कलेक्ट्रेट और नगर परिषद के चक्कर लगाती दिखाई गई। कुल दूरी 23 किलोमीटर दर्ज की गई।

वहीं—

  • गाड़ी 2776 सुबह 9 बजे से शाम 6:15 बजे तक एसीबी कार्यालय और कलेक्ट्रेट गई, लेकिन इसमें 35 किलोमीटर दर्ज किए गए।

छोटे रूट पर किलोमीटर ज्यादा दिखाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

लॉग बुक में कटिंग और ओवरराइटिंग

RTI से मिली लॉग बुक की प्रतियों में अधिकारियों के हस्ताक्षर वाले कॉलम में कटिंग और ओवरराइटिंग दिखाई दी है। आरोप है कि पहले हस्ताक्षर किए गए और बाद में उन्हें काटकर बदलाव किया गया।

दस्तावेजों के अनुसार यह पूरा मामला सरकारी बजट और तय किलोमीटर को पूरा दिखाने के लिए फर्जी तरीके से गाड़ियों के संचालन से जुड़ा हो सकता है।

तय किराया और किलोमीटर का खेल

वित्त विभाग के नियमों के मुताबिक सरकारी अनुबंधित वाहनों के लिए किलोमीटर और मासिक भुगतान तय होता है।

संचालन क्षेत्र निर्धारित किलोमीटर मासिक किराया
एक ही जिले में संचालन 2000 KM ₹33,000 से ₹36,000
दूसरे जिले तक संचालन 2200 KM ₹37,000 से ₹38,000
अन्य स्वीकृत वाहन 1500 KM ₹27,000 से ₹28,000

आरोप है कि तय बजट और किराया लेने के लिए कागजों में किलोमीटर बढ़ाकर दिखाए गए।

अधिकारी ने क्या कहा?

मामले को लेकर सीडीईओ अरूणा गारू ने कहा कि एक व्यक्ति द्वारा एक ही समय में दो वाहन इस्तेमाल करने का मामला असामान्य है और इसकी जांच कराई जाएगी।

वहीं एडीपीसी कल्पना शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि सिविल इंजीनियर के एसीबी ट्रैप होने के बाद तीन महीने तक लॉग बुक पर हस्ताक्षर नहीं हुए थे, जिसके कारण चालक का वेतन अटक गया था।

उन्होंने कहा कि मानवीय आधार पर भूलवश हस्ताक्षर किए गए थे और बाद में तकनीकी गलती का अहसास होने पर उन्हें काटा गया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि संबंधित अवधि का कोई यात्रा भत्ता नहीं लिया गया।

जांच के बाद खुल सकते हैं बड़े राज

अब इस पूरे मामले में विभागीय जांच की बात कही जा रही है। यदि दस्तावेजों में हेरफेर और फर्जी यात्रा रिकॉर्ड की पुष्टि होती है, तो यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय भ्रष्टाचार की श्रेणी में आ सकता है।