राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालत के आदेशों की लगातार अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए करौली जिले की नादौती तहसील के तहसीलदार दीनदयाल शर्मा और पटवारी भरत सिंह गुर्जर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए इसे न्यायालय के आदेशों का अपमान और कर्तव्यों की अनदेखी बताया है।

कोर्ट ने जताई नाराजगी, कहा- आदेशों का कोई सम्मान नहीं

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि संबंधित अधिकारियों के मन में अदालत के आदेशों के प्रति कोई सम्मान नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से कर्तव्य में लापरवाही और आदेशों की अवहेलना का मामला है।

अतिक्रमण मामले में हुई थी याचिका

यह मामला नादौती तहसील में अतिक्रमण से जुड़ा हुआ है, जहां रूपराज प्रजापत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बार-बार अतिक्रमण हटाने के बावजूद स्थान पर दोबारा कब्जा कर लिया जाता है।

कोर्ट ने 27 अप्रैल 2026 को आदेश देते हुए अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकारियों द्वारा दो महीने तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

अदालत में स्वीकार की गई लापरवाही

सुनवाई के दौरान 2 जुलाई को अधिकारियों ने स्वयं स्वीकार किया कि क्षेत्र में अतिक्रमण अभी भी मौजूद है और इसे हटाने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आदेश के बावजूद कार्रवाई न होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

सस्पेंशन और विभागीय जांच के आदेश

हाईकोर्ट ने राजस्व सचिव को निर्देश दिया है कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि जांच पूरी होने तक दोनों अधिकारी निलंबित रहेंगे।

सरकार को सख्त निर्देश

कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि संबंधित पुलिस थाने और राजस्व अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने के आदेश जारी किए जाएं, ताकि अतिक्रमण हटाया जा सके और अगली सुनवाई में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके। मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को निर्धारित की गई है।