भीलवाड़ा। शाहपुरा से भाजपा विधायक लालाराम बैरवा पर गोशाला के नाम पर करीब 20 बीघा चारागाह भूमि पर कब्जा करने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि जिस जमीन को गोशाला संचालन के लिए आवंटित कराने की प्रक्रिया चल रही थी, उस पर पहले ही तारबंदी कर निर्माण कर लिया गया है। इतना ही नहीं, मौके पर बिजली का कनेक्शन भी मौजूद है, जबकि स्थल पर एक भी गाय नहीं मिली।

मामले की पड़ताल में सामने आया कि संबंधित जमीन पर देव गौशाला सेवा संस्थान के नाम से आवंटन का प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि, राजस्थान सरकार के नियमों के अनुसार किसी भी गौशाला को भूमि आवंटन के लिए संस्था का राजस्थान गौशाला अधिनियम, 1960 के तहत पंजीकृत होना और कम से कम तीन वर्षों से गौशाला का संचालन करना अनिवार्य है। ये शर्तें पूरी नहीं होने के कारण राजस्व विभाग ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया, लेकिन जमीन पर कब्जा अभी भी बरकरार बताया जा रहा है।

संस्था में विधायक और परिवार की अहम भूमिका

दस्तावेजों के अनुसार, देव गौशाला सेवा संस्थान में विधायक लालाराम बैरवा सचिव हैं। उनके छोटे बेटे को संस्था का अध्यक्ष, बड़े बेटे को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। विधायक के निजी सहायक हुकमचंद कुमावत उपाध्यक्ष हैं, जबकि उनके भतीजे का भी संस्था में नाम शामिल है। इसी कारण पूरे मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

चार माह में विभागों से तेजी से आगे बढ़ी फाइल

संस्थान का पंजीकरण 21 अगस्त 2025 को सहकारिता विभाग में हुआ। इसके बाद महज चार महीनों के भीतर फाइल तहसीलदार, एसडीएम, जिला कलेक्टर होते हुए राजस्व विभाग तक पहुंच गई।

शुरुआत में शाहपुरा तहसीलदार ने 11 सितंबर 2025 को आमलीकला क्षेत्र में दो हेक्टेयर भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव भेजा था। एसडीएम ने भी इसे आगे बढ़ाया, लेकिन बाद में उसी फाइल में एक नया पत्र जोड़कर जमीन का स्थान बदल दिया गया। संशोधित प्रस्ताव में भूमि माताजी का खेड़ा के पास, शाहपुरा-केकड़ी मेगा हाईवे के समीप दर्शाई गई, जहां वर्तमान में कब्जे का आरोप है।

बिजली कनेक्शन भी विवादों में

जिस जमीन पर कब्जे के आरोप लगाए जा रहे हैं, वहां अस्थायी बिजली कनेक्शन विधायक के बेटे चिनार बैरवा के नाम पर जारी किया गया है। इस कनेक्शन को लेकर हुए विवाद के बाद बिजली विभाग के एक एक्सईएन (XEN) को एपीओ भी किया गया था।

राजस्व विभाग ने क्यों किया प्रस्ताव खारिज?

राजस्व विभाग के शासन उप सचिव हरिसिंह मीणा के अनुसार, गौशाला को भूमि आवंटन तभी किया जा सकता है जब संस्था राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1958 और राजस्थान गौशाला अधिनियम, 1960 के तहत पंजीकृत हो तथा कम से कम तीन वर्षों से गौशाला संचालित कर रही हो। संबंधित संस्था इन शर्तों को पूरा नहीं करती थी, इसलिए भूमि आवंटन का प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया।

विधायक ने क्या कहा?

भाजपा विधायक लालाराम बैरवा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जमीन आवंटन की प्रक्रिया अभी जारी है। उनका कहना है कि वे किसी भी प्रकार से जमीन हड़पना नहीं चाहते और सभी कार्य नियमानुसार किए जा रहे हैं।

फिलहाल, गोशाला के नाम पर भूमि उपयोग, मौके पर गायों की अनुपस्थिति, परिवार के सदस्यों की संस्था में भूमिका और आवंटन प्रक्रिया को लेकर यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।