राजस्थान में 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' (One State-One Election) के तहत हुए निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक और अभूतपूर्व जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व, जमीनी रणनीतियों और मजबूत संगठनात्मक ढांचे ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा में चुनाव लड़ा जाए, तो बंपर सफलता तय है।
अब तक घोषित 303 शहरी स्थानीय निकायों के नतीजों में से भाजपा ने 200 निकायों में अपना बोर्ड (प्रमुख) बनाकर दो-तिहाई यानी 66% का भारी बहुमत हासिल किया है। वहीं, कांग्रेस महज 95 सीटों पर सिमट गई है। इस चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस पर 105 सीटों की मजबूत बढ़त बनाई है।
क्या है हिट होने वाला 'भजनलाल मॉडल'?
इस जीत का सबसे बड़ा श्रेय 'भजनलाल मॉडल' को दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रत्याशी चयन से लेकर टिकट वितरण तक पूरी प्रक्रिया पर खुद बारीकी से नजर रखी। राजस्थान के निकाय चुनावों के इतिहास में पहली बार रोड शो जैसा हाई-प्रोफाइल प्रचार मॉडल अपनाया गया। सत्ताधारी दलों को अक्सर एंटी-इन्कम्बेंसी का सामना करना पड़ता है, लेकिन सीएम शर्मा ने सुशासन, शहरी विकास और अपनी सरकार की उपलब्धियों को मुख्य एजेंडा बनाकर विपक्ष के सारे चक्रव्यूह ध्वस्त कर दिए।
अशोक गहलोत के गढ़ जोधपुर में लहराया भगवा
चुनाव में सबसे चौंकाने वाले और बेहतरीन नतीजे जोधपुर संभाग से आए हैं, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता अशोक गहलोत का गढ़ माना जाता है।
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जोधपुर संभाग: यहां के 41 निकायों में से भाजपा ने 35 (87 प्रतिशत) पर अपना बोर्ड बनाया है, जबकि कांग्रेस केवल 5 तक सीमित रह गई। भाजपा ने निर्दलीयों के समर्थन से पाली नगर निगम में भी अपना बोर्ड बना लिया है और जोधपुर नगर निगम में भी मजबूत स्थिति में है, जिसका परिणाम आना बाकी है।
भरतपुर से जयपुर तक... हर संभाग में भाजपा का दबदबा
सीएम भजनलाल शर्मा खुद भरतपुर क्षेत्र से आते हैं और उनकी ग्राउंड जीरो की समझ का असर यहां साफ दिखा। प्रदेश के सभी संभागों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है:
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भरतपुर संभाग: कुल 32 निकायों में से भाजपा ने 24 (75%) पर कब्जा जमाया। कांग्रेस को सिर्फ 7 सीटें मिलीं।
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अजमेर संभाग: भाजपा ने पिछड़ने के बावजूद निर्दलीयों के समर्थन से अजमेर में अपना महापौर बनाया। संभाग के 52 में से 36 निकायों (69%) पर भाजपा काबिज हुई, कांग्रेस को 14 सीटें मिलीं।
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बीकानेर संभाग: कुल 37 में से 24 निकायों (66%) में भाजपा ने जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 10 सीटें मिलीं।
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उदयपुर संभाग: 28 निकायों में से 18 (64%) पर भाजपा जीती, कांग्रेस ने 9 सीटें हासिल कीं।
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कोटा एवं जयपुर संभाग: इन बड़े संभागों में भी भाजपा ने आधे से अधिक निकायों पर जीत हासिल की है। जयपुर के 91 निकायों में से 48 पर भाजपा और 40 पर कांग्रेस जीती। वहीं, कोटा के 28 में से 15 निकायों में भाजपा ने अपना बोर्ड बनाया।
9 जिलों में कांग्रेस का पूरी तरह सूपड़ा साफ
इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि 9 प्रशासनिक जिलों में कांग्रेस पूरी तरह से साफ हो गई। बालोतरा, बाड़मेर, ब्यावर, भरतपुर, डीग, डूंगरपुर, कोटा, फलोदी और पाली ऐसे जिले रहे जहां कांग्रेस अपना एक भी बोर्ड नहीं बना सकी। इसके अलावा अजमेर, बांसवाड़ा, जैसलमेर, जालोर, प्रतापगढ़ और सिरोही जिलों में कांग्रेस बमुश्किल 1-1 सीट ही जीत पाई।
इन सीटों के परिणाम हैं बाकी
फिलहाल जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के साथ-साथ सुकेत, खाटूश्यामजी और श्रीविजयनगर नगर पालिका के अंतिम परिणाम आने बाकी हैं।
इस बंपर जीत के बाद भाजपा गदगद है और आने वाले पंचायत चुनावों में भी इसी 'भजनलाल मॉडल' को लागू कर अपनी जीत का प्रतिशत और बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। सरकार और संगठन के बेहतरीन तालमेल ने राजस्थान में भाजपा को एक नई मजबूती प्रदान की है।