जोधपुर। शहर के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की घटना के कुछ ही समय बाद अब उम्मेद अस्पताल में भी चिंताजनक मामला सामने आया है। पिछले दो दिनों के दौरान सिजेरियन प्रसव कराने वाली पांच महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई, जिनमें दो की हालत गंभीर होने पर वेंटिलेटर पर रखना पड़ा, जबकि तीन अन्य का आईसीयू में इलाज जारी है।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को ऑपरेशन के बाद दो प्रसूताओं की हालत अचानक गंभीर हो गई। वहीं इससे एक दिन पहले तीन अन्य महिलाओं में अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट पार्टम हेमरेज) की स्थिति बनने पर उन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। डॉक्टरों का कहना है कि प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव एक गंभीर चिकित्सीय आपात स्थिति होती है और समय पर उपचार नहीं मिलने पर मरीज की जान को खतरा हो सकता है।

एक प्रसूता को गलत ब्लड चढ़ाने का मामला आया सामने

इसी बीच अस्पताल में एक और गंभीर लापरवाही सामने आई है। जानकारी के अनुसार, एक प्रसूता को गलती से गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ा दिया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मरीज और दूसरी महिला का नाम तथा उनके पति का नाम काफी हद तक समान होने के कारण ब्लड यूनिट की पहचान में चूक हो गई।

परिजनों के अनुसार, धापू नाम की महिला का 11 जुलाई को बावड़ी क्षेत्र में सामान्य प्रसव हुआ था। रक्त की कमी होने पर उसे उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया, जहां पहली बार ओ पॉजिटिव रक्त चढ़ाया गया, जिससे उसकी स्थिति सामान्य रही। आरोप है कि 12 जुलाई की रात दूसरी बार गलती से बी पॉजिटिव ब्लड चढ़ा दिया गया, जिसके तुरंत बाद महिला को कंपकंपी शुरू हो गई और पेशाब में खून आने लगा। हालत बिगड़ने पर उसे महात्मा गांधी अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

जांच समिति ने मानी कर्मचारियों की गलती

मामले की जांच के लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा गठित समिति ने प्रारंभिक जांच में माना है कि ब्लड यूनिट की पहचान करने में गंभीर चूक हुई। रिपोर्ट के अनुसार, महिला को ओ पॉजिटिव की जगह बी पॉजिटिव रक्त चढ़ा दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों मरीजों के ब्लड ग्रुप और अन्य पहचान संबंधी विवरण अलग-अलग दर्ज थे, इसके बावजूद ब्लड बैंक स्तर पर आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

गौरतलब है कि इससे पहले एम्स जोधपुर में भी गलत ब्लड चढ़ाने के मामले में एक मरीज की मौत हो चुकी है। ऐसे में उम्मेद अस्पताल की यह घटना सरकारी अस्पतालों में ब्लड ट्रांसफ्यूजन प्रक्रिया और मरीजों की पहचान प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

वहीं, महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती महिला के परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से अब तक उन्हें महिला की तबीयत बिगड़ने के स्पष्ट कारणों की जानकारी नहीं दी गई है। पूरे मामले की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।