ऋषभदेव धर्म परिवर्तन मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 14 आरोपियों की जमानत खारिज
उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर जिले के ऋषभदेव में सामने आए कथित जबरन धर्म परिवर्तन मामले में गिरफ्तार 14 आरोपियों को जोधपुर हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए मामले को गंभीर प्रकृति का माना है।
जस्टिस सुनील बेनीवाल की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच के आधार पर यह मामला सामान्य नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी एक संगठित नेटवर्क (सिंडिकेट) की तरह काम कर रहे थे, इसलिए इस स्तर पर उन्हें जमानत देना उचित नहीं होगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला जून 2026 का है। पुलिस के अनुसार 5, 6 और 7 जून को उदयपुर के ऋषभदेव क्षेत्र में एक धार्मिक शिविर आयोजित किया गया था। शिकायत के आधार पर आरोप है कि इस शिविर की आड़ में कुछ लोगों को कथित रूप से डराकर, दबाव बनाकर और लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।
इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और मामला दर्ज किया। जांच के दौरान कई लोगों से पूछताछ की गई और कथित तौर पर धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी सामग्री भी जब्त की गई।
मुख्य आरोपी पर क्या आरोप हैं?
पुलिस जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी अमित कुमार छत्तीसगढ़ से उदयपुर आया था और वह पंजाब के अंकुर नरूला के संपर्क में था। जांच एजेंसियों का दावा है कि दोनों के बीच लगातार बातचीत होती रही।
वहीं एक अन्य आरोपी हरीश के बारे में पुलिस का आरोप है कि वह पिछले चार वर्षों में लगभग 150 से 200 लोगों का धर्म परिवर्तन करा चुका है। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों के पास से धार्मिक साहित्य और अन्य सामग्री भी जब्त करने का दावा किया है।
इन आरोपों की पुष्टि अभी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना बाकी है।
कब हुई गिरफ्तारी?
पुलिस ने 6 जून 2026 को ऋषभदेव थाने में मामला दर्ज किया और उसी दिन कार्रवाई करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में हरीश, अमित कुमार, पलाश, आशीष, भेरूलाल, बाबूलाल, शंकरलाल, राकेश, अनिल कलसुआ, नारायण, दिनेश और पलाश शामिल हैं।
इसके बाद जांच आगे बढ़ने पर 14 जून को प्रभुलाल और सोहनलाल को भी न्यायिक हिरासत में लिया गया। सभी आरोपियों के खिलाफ राजस्थान धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2025 सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जोधपुर हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी 14 आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि फिलहाल उपलब्ध तथ्यों और जांच को देखते हुए आरोपियों को राहत देना उचित नहीं होगा।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा चार्जशीट (चालान) दाखिल किए जाने के बाद आरोपी कानून के अनुसार दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
जांच जारी
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस सबूतों को जुटाने में लगी हुई है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू होगी। अदालत में आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय मुकदमे की सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा।