राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में करोड़ों रुपये के बीमा घोटाले का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। कपासन थाना पुलिस ने 2 करोड़ रुपये के फर्जी बीमा क्लेम मामले में राजकीय उप जिला चिकित्सालय में कार्यरत डॉ. सुग्रीव मीणा को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक की वास्तविक मौत की वजह छिपाकर करंट लगने से मौत की झूठी कहानी तैयार की गई थी, ताकि बीमा कंपनी से भारी भरकम राशि हासिल की जा सके।

केयर हेल्थ इंश्योरेंस की शिकायत से खुला मामला

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब केयर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने कपासन थाने में शिकायत दर्ज करवाई। कंपनी को मृतक की मौत से जुड़े तथ्यों पर संदेह हुआ, जिसके बाद आंतरिक जांच शुरू की गई। जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने मौत की पूरी कहानी पर सवाल खड़े कर दिए।

करंट लगने से मौत की बताई गई थी वजह

मामले के अनुसार मृतक को तड़के करीब 3 बजे अस्पताल लाया गया था, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण करंट लगना बताया गया था। इसी आधार पर बीमा क्लेम की प्रक्रिया शुरू की गई। लेकिन बाद में जांच में सामने आया कि मौत की असली वजह करंट नहीं थी।

जांच में सामने आई टीबी से मौत की सच्चाई

बीमा कंपनी और पुलिस की विस्तृत जांच में खुलासा हुआ कि मृतक लंबे समय से टीबी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित था। मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच के दौरान पता चला कि मौत बीमारी के कारण हुई थी, लेकिन बीमा राशि हासिल करने के लिए इसे करंट हादसा बताकर पेश किया गया।

डॉक्टर पर गंभीर आरोप

पुलिस के अनुसार डॉ. सुग्रीव मीणा ने वास्तविक तथ्यों की जानकारी होने के बावजूद गलत पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में मौत का कारण बदलकर दर्शाया गया, जिससे बीमा क्लेम को वैध साबित किया जा सके। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कार्य जानबूझकर किया गया और इसमें सुनियोजित साजिश की आशंका है।

मृतक का बेटा पहले ही हो चुका गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस मृतक के बेटे नारायणलाल जाट को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। आरोप है कि उसने बीमा राशि प्राप्त करने के उद्देश्य से मौत से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर क्लेम प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

संगठित गिरोह की आशंका

पुलिस को शक है कि यह सिर्फ दो लोगों तक सीमित मामला नहीं है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस फर्जीवाड़े में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

मेडिकल और कानूनी पहलुओं की हो रही जांच

पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पताल दस्तावेजों और बीमा क्लेम से जुड़े कागजात की बारीकी से जांच की है। जांच में समय, मेडिकल तथ्यों और मौत के कारणों में कई विरोधाभास पाए गए हैं। इन्हीं आधारों पर डॉक्टर की गिरफ्तारी की गई है।

आगे क्या?

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और जल्द ही इस घोटाले से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो गिरफ्तारियों का दायरा बढ़ सकता है। यह मामला प्रदेश में बीमा धोखाधड़ी और मेडिकल दस्तावेजों में हेरफेर का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।