भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों, सरकार की प्रोत्साहन नीतियों और बेहतर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते उपभोक्ता तेजी से इलेक्ट्रिक कारों की ओर रुख कर रहे हैं। मई 2026 के बिक्री आंकड़ों ने इस बदलाव को और स्पष्ट कर दिया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में सालाना आधार पर करीब 81 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।
ऑटोमोबाइल उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती मांग ने पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों के मुकाबले EV सेगमेंट को नई गति दी है। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल मई में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी तकनीक में सुधार, लंबी ड्राइविंग रेंज और कम रखरखाव लागत उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित कर रही है।
सरकार भी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं और प्रोत्साहनों पर काम कर रही है। कई राज्यों में EV खरीदने पर टैक्स छूट, रजिस्ट्रेशन फीस में राहत और सब्सिडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा देशभर में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत हुआ है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय ग्राहकों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां इलेक्ट्रिक वाहनों को सीमित विकल्प माना जाता था, वहीं अब विभिन्न कीमतों और फीचर्स के साथ कई मॉडल उपलब्ध हैं। इससे मध्यम वर्ग के ग्राहकों के बीच भी EV की मांग बढ़ी है।
वाहन निर्माताओं ने भी इलेक्ट्रिक सेगमेंट में निवेश बढ़ा दिया है। कई कंपनियां नई इलेक्ट्रिक कारों को लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं, जबकि मौजूदा मॉडल्स को बेहतर तकनीक और फीचर्स के साथ अपडेट किया जा रहा है। इससे आने वाले वर्षों में EV बाजार के और तेजी से विस्तार की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चार्जिंग नेटवर्क और बैटरी उत्पादन क्षमता में इसी तरह सुधार जारी रहा, तो भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार आने वाले समय में दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में शामिल हो सकता है। मई में दर्ज हुई 81 प्रतिशत की वृद्धि इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।