हाल के समय में सोने-चांदी के रेट में आई लगातार बढ़ोतरी ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पर भी गहरा प्रभाव डाला है। आयुर्वेद में असाध्य और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए स्वर्ण भस्म (सोने की भस्म), रजत भस्म (चांदी की भस्म) और मोती पिष्टी जैसी धातु-रत्न आधारित दवाओं का बहुत महत्व है। ये भस्म सुपर एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करती हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करती हैं। लेकिन सोने और चांदी की कीमतें बढ़ने से इन भस्मों के निर्माण की लागत में भारी इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर पूरी दवा की कीमत पर पड़ रहा है। राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय के उपाधीक्षक डॉ. चंद्रप्रकाश दीक्षित के अनुसार, कई महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक दवाओं की कीमतों में हाल के महीनों में काफी वृद्धि देखी गई है। नतीजा यह है कि पहले जो दवाएं मरीज आसानी से खरीद लेते थे, अब वे उनके लिए बहुत महंगी हो गई हैं। मरीज बिना धातु-रत्न वाली सस्ती दवाओं की ओर मुड़ रहे हैं और कई चिकित्सक भी इन महंगी दवाओं को लिखने से हिचकिचा रहे हैं। इस वजह से गंभीर रोगों के प्रभावी इलाज में आने वाली चुनौतियां बढ़ गई हैं।
सोने-चांदी की कीमतें बढ़ने से आयुर्वेदिक दवाएं क्यों हो रही हैं महंगी? जानिए इनका सीधा कनेक्शन
सोने और चांदी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का सीधा असर आयुर्वेदिक दवाओं पर पड़ रहा है। खासकर स्वर्ण भस्म, रजत भस्म और अन्य धातु-रत्न आधारित औषधियों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे गंभीर रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ये दवाएं आम और मध्यम वर्ग के लिए लगभग पहुंच से बाहर हो गई हैं।
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