डॉक्टर बनने का सपना हर साल लाखों छात्र देखते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी कई प्रतिभाशाली बच्चों के सपनों के बीच सबसे बड़ी बाधा बन जाती है। किसी के पिता ट्रक ड्राइवर हैं, कोई किसान परिवार से आता है तो किसी के पिता फलों का ठेला लगाकर घर चलाते हैं। ऐसे ही मेधावी और जरूरतमंद छात्रों के सपनों को साकार करने के लिए कोटा में शिक्षा संबल योजना संचालित की जा रही है।
शिक्षा संबल योजना के तहत सरकारी स्कूलों और हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को NEET की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग, आवास और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। वर्ष 2026-27 सत्र के लिए आयोजित चयन परीक्षा में इस बार 126 छात्रों का चयन किया गया है।
यह योजना एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास और एक प्रमुख कोचिंग संस्थान के सहयोग से संचालित की जा रही है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों के हिंदी माध्यम के छात्रों का चयन परीक्षा के माध्यम से किया जाता है।
ट्रक ड्राइवर की बेटी बनेगी डॉक्टर
छत्तीसगढ़ के पाटियापाली गांव की रहने वाली दिव्या का सपना डॉक्टर बनने का है। उनके पिता सुखचैन ट्रक ड्राइवर हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वे बेटी को कोटा भेज सकें।
दिव्या ने बताया कि उनके गांव में कोई एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है और नजदीकी अस्पताल 35 किलोमीटर दूर है। कई बार गंभीर मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। इसी वजह से उन्होंने डॉक्टर बनने का संकल्प लिया। स्कूल की शिक्षिका से योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने परीक्षा दी और चयनित हो गईं।
दिव्या के पिता ने बताया कि कोटा आने के लिए उन्हें रिश्तेदारों से 20 हजार रुपए उधार लेने पड़े, लेकिन अब बेटी की पढ़ाई की चिंता खत्म हो गई है।
फल का ठेला लगाने वाले की बेटी को मिला सहारा
कोटा के सोगरिया क्षेत्र की रहने वाली प्रीति के पिता मदन झा फलों का ठेला लगाते हैं। परिवार में चार बेटियां हैं और सीमित आय में सभी की पढ़ाई का खर्च उठाना आसान नहीं था।
प्रीति ने बताया कि डॉक्टर बनने का सपना तो था, लेकिन महंगी कोचिंग फीस के कारण यह सपना अधूरा लगने लगा था। शिक्षा संबल योजना ने उन्हें नई उम्मीद दी है और अब वे पूरे आत्मविश्वास के साथ NEET की तैयारी करेंगी।
दो एकड़ जमीन वाले किसान की बेटी को मिला अवसर
मध्यप्रदेश के बरनी जागीर गांव की रहने वाली श्रद्धा भी डॉक्टर बनना चाहती हैं। उनके पिता तोरण किसान हैं और केवल दो एकड़ जमीन पर खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
श्रद्धा ने बताया कि बचपन से डॉक्टर बनने का सपना देखा था, लेकिन आर्थिक हालात के कारण यह मुश्किल लग रहा था। योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने परीक्षा दी और चयनित हो गईं। अब उन्हें विश्वास है कि उनका सपना जरूर पूरा होगा।
पढ़ाई के साथ मिलेगी हर जरूरी सुविधा
योजना के तहत चयनित सभी छात्रों को कोचिंग के साथ-साथ रहने और खाने की व्यवस्था भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। गुरुवार से नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। ओरिएंटेशन कार्यक्रम में छात्रों को पढ़ाई की रणनीति, टाइम मैनेजमेंट, स्वास्थ्य और रिवीजन प्लान के बारे में जानकारी दी गई।
एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास के फाउंडर डायरेक्टर राजेश माहेश्वरी ने कहा कि शिक्षा संबल योजना उन परिवारों के सपनों को साकार करने का माध्यम है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देना चाहते हैं।
यह पहल उन हजारों प्रतिभाशाली छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण बन रही है, जिनके पास प्रतिभा तो है, लेकिन संसाधनों की कमी उनके सपनों के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती बनती है।