राजस्थान के सिरोही जिले के बरलूट थाना क्षेत्र के मंडवारिया गांव से सामाजिक बहिष्कार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि आर्थिक तंगी के कारण मृत्युभोज में घी के मालपुए नहीं बनवाने पर पंचों ने एक परिवार समेत 43 परिवारों का समाज से बहिष्कार कर दिया। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें राशन, पानी, मजदूरी और रिश्तेदारी तक से वंचित कर दिया गया है।
सादा मृत्युभोज बना विवाद की वजह
पीड़ित परिवारों के अनुसार, गांव निवासी सदाराम पुत्र बलवाजी का 5 जून को निधन हो गया था। 17 जून को आयोजित मृत्युभोज में परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण घी के मालपुए नहीं बनाए गए और केवल सादा भोजन कराया गया। इससे नाराज समाज के कुछ पंचों ने 18 जून को परिवार सहित उनके समर्थन में खड़े 42 अन्य परिवारों का भी सामाजिक बहिष्कार कर दिया।
राशन, पानी और मजदूरी पर रोक का आरोप
पीड़ितों का आरोप है कि गांव के दुकानदार उन्हें राशन नहीं दे रहे हैं। खेत मालिक मजदूरी पर नहीं रख रहे और सार्वजनिक कुएं से पानी भरने तक की अनुमति नहीं दी जा रही। हालात ऐसे हैं कि कई परिवारों के घरों में बच्चों को भूखे सोना पड़ रहा है।
शादी-ब्याह और रिश्तेदारी पर भी रोक
सामाजिक बहिष्कार का असर परिवारों के सामाजिक जीवन पर भी पड़ा है। पीड़ित गोपाल ने बताया कि 20 जून को उनकी बुआ की बेटी की शादी थी, लेकिन पंचों के डर से वे शामिल नहीं हो सके। वहीं भोगीलाल ने बताया कि उनके भाई की 24 जून को शादी थी, लेकिन दंड के भय से ननिहाल पक्ष ने निमंत्रण तक स्वीकार नहीं किया और शादी में कोई रिश्तेदार नहीं पहुंचा।
पीड़ितों ने सुनाई अपनी आपबीती
पीड़ित तेजाराम का कहना है कि पंचों ने आरोप लगाया कि सादा भोजन कराकर उन्होंने समाज की नाक कटवा दी। अब गांव में कोई उनसे बात नहीं करता और पानी तक भरने नहीं दिया जाता।
कमला देवी ने कहा कि गांव में उनकी बहू-बेटियों से भी कोई बात नहीं करता। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आर्थिक तंगी के कारण मालपुए नहीं बनाए गए तो क्या वे इंसान नहीं रहे।
पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप
पीड़ित परिवारों ने 20 जून को बरलूट थाने में नामजद शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसके बाद गुरुवार को सभी 43 परिवार जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की।
वहीं बरलूट थाने के जांच अधिकारी रमेश कुमार ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच की जा रही है। प्रारंभिक तौर पर मामला पुरानी रंजिश से जुड़ा भी प्रतीत हो रहा है।
क्या कहता है कानून?
राजस्थान सामाजिक बहिष्कार निषेध अधिनियम, 2019 के तहत किसी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक, आर्थिक या व्यावसायिक बहिष्कार करना गैरकानूनी है। जाति, धर्म या परंपरा के नाम पर हुक्का-पानी बंद करना, सार्वजनिक स्थानों या कुओं से पानी भरने से रोकना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर सात वर्ष तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।