राजस्थान में फर्जी फर्मों के जरिए टैक्स चोरी और इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC के दुरुपयोग के खिलाफ वाणिज्यिक कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने प्रदेश के सभी 16 जोन में एक साथ संयुक्त अभियान चलाकर संदिग्ध फर्मों की जांच की।

अभियान के दौरान कुल 137 फर्मों की जांच की गई। इनमें से 106 फर्में फर्जी पाई गईं, जबकि 31 फर्में वास्तविक मिलीं। हालांकि, इन वास्तविक फर्मों में भी टैक्स से जुड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं।

विभाग अब फर्जी पंजीयन, बिना वास्तविक कारोबार के इनवॉइस जारी करने, अपात्र ITC का फायदा उठाने और उसे आगे ट्रांसफर करने जैसी गतिविधियों पर खास नजर रख रहा है।

106 फर्जी फर्मों का 547 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

वाणिज्यिक कर विभाग के मुताबिक, जांच में फर्जी पाई गई 106 फर्मों का कुल कारोबार 547.58 करोड़ रुपये रहा। इन फर्मों से जुड़े करीब 77.65 करोड़ रुपये के ITC की जांच की गई।

जांच के दौरान इन फर्मों के ITC लेजर में उपलब्ध राशि में से करीब 4.65 करोड़ रुपये का ITC ब्लॉक किया गया।

106 फर्जी फर्मों में से 78 फर्में राज्य क्षेत्राधिकार और 28 फर्में केंद्र क्षेत्राधिकार के अंतर्गत पाई गईं। राज्य क्षेत्राधिकार वाली फर्मों का कारोबार करीब 460 करोड़ रुपये, जबकि केंद्र क्षेत्राधिकार वाली फर्मों का कारोबार करीब 87.58 करोड़ रुपये रहा।

31 असली फर्मों में भी मिली गड़बड़ी

जांच के दौरान 31 फर्में वास्तविक पाई गईं, लेकिन इनमें भी टैक्स संबंधी अनियमितताएं सामने आईं।

इन 31 फर्मों का कुल कारोबार करीब 18.93 करोड़ रुपये पाया गया। इनसे जुड़े करीब 2.26 करोड़ रुपये के ITC की जांच की गई। जांच के दौरान करीब 17.60 लाख रुपये का ITC ब्लॉक किया गया।

इन 31 वास्तविक फर्मों में 25 फर्में राज्य क्षेत्राधिकार और 6 फर्में केंद्र क्षेत्राधिकार से जुड़ी हुई हैं।

डेटा के जरिए संदिग्ध फर्मों पर नजर

वाणिज्यिक कर विभाग अब तकनीकी और डेटा आधारित जांच के जरिए संदिग्ध फर्मों की पहचान कर रहा है। इसके तहत फर्म के पंजीयन, वास्तविक कारोबार और ITC से जुड़े लेन-देन का सत्यापन किया जा रहा है।

विभाग की नजर खास तौर पर उन मामलों पर है, जहां बिना वास्तविक कारोबार के इनवॉइस जारी कर ITC का फायदा उठाया जाता है या फिर अपात्र ITC को दूसरी फर्मों तक ट्रांसफर किया जाता है।

विभाग का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य फर्जी ITC और टैक्स चोरी के नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाना है। साथ ही ईमानदारी से टैक्स जमा करने वाले कारोबारियों के हितों की रक्षा करना भी कार्रवाई का अहम उद्देश्य है।

जांच में सामने आए तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित फर्मों के खिलाफ नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।