देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार, 11 अगस्त को 'Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026' को मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब यह विधेयक कानून बन गया है।
इस कानून के जरिए 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' के समान वैधानिक संरक्षण दिया गया है। यानी अब राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकना या ऐसे कार्यक्रम में बाधा डालना कानून के तहत दंडनीय अपराध होगा।
कितनी होगी सजा?
नए कानून में 'वंदे मातरम्' के गायन को जानबूझकर रोकने या ऐसे गायन में जुटी सभा में बाधा डालने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। यही प्रावधान पहले राष्ट्रीय गान के संबंध में लागू था, जिसे अब राष्ट्रीय गीत तक बढ़ाया गया है।
वहीं, कानून के मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक दूसरी और उसके बाद की हर दोषसिद्धि पर कम से कम एक साल की जेल का प्रावधान है।
संसद से पास होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी
'वंदे मातरम्' को कानूनी संरक्षण देने वाला यह संशोधन Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में बदलाव करता है। विधेयक को जुलाई में संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिली थी। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत को लेकर कानून में मौजूद उस अंतर को खत्म करना था, जिसके तहत राष्ट्रीय गान को तो विशेष वैधानिक सुरक्षा मिली हुई थी, लेकिन 'वंदे मातरम्' के लिए वैसा स्पष्ट प्रावधान नहीं था।
लाल किले पर पहली बार खास कार्यक्रम
स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी इस बार 'वंदे मातरम्' को खास जगह मिलने वाली है। सरकार के अनुसार, लाल किले की प्राचीर से इस साल पहली बार 'वंदे मातरम्' का गायन होगा।
वहीं, इस साल 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में इससे जुड़ा विशेष कार्यक्रम भी देखने को मिलेगा।
यानी स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ 'वंदे मातरम्' को लेकर अब कानूनी स्थिति भी साफ हो गई है। नए कानून के तहत इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालना अब सिर्फ आपत्तिजनक हरकत नहीं, बल्कि दंडनीय अपराध होगा।