नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में केंद्र की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार यानी NDA संसद में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि लोकसभा में बहुमत होने के बावजूद संविधान संशोधन जैसे बड़े फैसलों के लिए जरूरी दो-तिहाई समर्थन का आंकड़ा अभी भी उसके पास नहीं है। लेकिन हाल के राजनीतिक बदलावों और विपक्षी खेमे में संभावित टूट की चर्चाओं ने राज्यसभा के गणित को लेकर नई संभावनाएं पैदा कर दी हैं।

संविधान संशोधन के लिए क्यों जरूरी है दो-तिहाई बहुमत?

संसद में सामान्य कानून साधारण बहुमत से पास हो जाते हैं, लेकिन संविधान संशोधन विधेयक के लिए अलग प्रक्रिया होती है। ऐसे विधेयक को पारित करने के लिए दोनों सदनों में कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित होकर मतदान करने वाले सांसदों में कम से कम दो-तिहाई समर्थन जरूरी होता है।

यही वजह है कि केंद्र सरकारें संविधान में बड़े बदलावों के लिए संसद में मजबूत संख्या बल चाहती हैं।

लोकसभा में NDA की स्थिति मजबूत

लोकसभा चुनाव 2024 के बाद बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या है। बीजेपी अकेले बहुमत से दूर रही, लेकिन सहयोगी दलों के समर्थन से गठबंधन ने सरकार बनाई।

इसके बाद कुछ विपक्षी दलों में अंदरूनी मतभेद और राजनीतिक बदलावों की चर्चाओं के कारण NDA की लोकसभा में ताकत बढ़ने की अटकलें लगती रही हैं।

राज्यसभा में बढ़ सकती है NDA की ताकत

राज्यसभा में NDA पहले से लोकसभा की तुलना में बेहतर स्थिति में है। अलग-अलग सहयोगी दलों और समर्थक सांसदों के कारण गठबंधन का आंकड़ा बहुमत के करीब बना हुआ है।

राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 है। किसी भी संवैधानिक संशोधन के लिए दो-तिहाई समर्थन का आंकड़ा करीब 163 सांसदों के आसपास बैठता है।

मौजूदा समीकरणों में NDA इस आंकड़े से अभी नीचे है, लेकिन खाली होने वाली सीटों पर होने वाले चुनाव और राजनीतिक समर्थन मिलने की स्थिति में दूरी कम हो सकती है।

विपक्षी दलों में बदलाव से बदल सकता है गणित

राजनीतिक गलियारों में कुछ विपक्षी दलों के सांसदों के NDA के करीब आने की चर्चाएं चलती रहती हैं। अगर आने वाले समय में कुछ सांसद पाला बदलते हैं, इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ते हैं या मतदान के समय अनुपस्थित रहते हैं, तो सरकार को फायदा मिल सकता है।

हालांकि सिर्फ चर्चाओं के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि NDA ने दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है। इसके लिए वास्तविक संख्या और सदन में होने वाले मतदान का रिकॉर्ड ही अंतिम स्थिति तय करेगा।

अभी NDA के सामने चुनौती बाकी

राज्यसभा में NDA की स्थिति मजबूत जरूर हुई है, लेकिन संविधान संशोधन के लिए जरूरी आरामदायक दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए उसे अभी और समर्थन की जरूरत होगी।

आने वाले महीनों में राज्यसभा चुनाव, उपचुनाव और विपक्षी दलों की रणनीति यह तय करेगी कि संसद का शक्ति संतुलन किस दिशा में जाता है।

फिलहाल इतना साफ है कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में NDA संसद के दोनों सदनों में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में है और विपक्षी एकजुटता की कमजोरी उसके लिए राजनीतिक लाभ का कारण बन सकती है।