राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। रविवार सुबह पुलिस ने इस मामले में जेल में बंद आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की। सुबह करीब 7 बजे पुलिस की आठ अलग-अलग टीमों ने एक साथ कार्रवाई करते हुए आरोपियों के घरों की तलाशी ली और उनके परिजनों व पड़ोसियों से पूछताछ की।
छापेमारी के दौरान मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, मनीष यादव और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के घरों पर ताला लगा मिला। कुछ देर बाद टिन्नू की मां मौके पर पहुंचीं और घर का ताला खोला, जिसके बाद पुलिस ने जांच की।
संपत्ति और लाइफस्टाइल की भी हो रही जांच
पुलिस के साथ राजस्व विभाग के अधिकारी, विशेष रूप से लेखपाल भी कार्रवाई में शामिल रहे। जांच टीम आरोपियों की संपत्ति, आय के स्रोत और पिछले कुछ समय में उनके रहन-सहन व लाइफस्टाइल में आए बदलाव की जानकारी जुटा रही है। पड़ोसियों से भी पूछताछ कर महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र की गई।
25 जून को हुई थी गिरफ्तारी
मामले में 25 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस ने रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। 26 जून को सभी आरोपियों को कोर्ट ने तीन दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
SIT जांच के बाद हुई कार्रवाई
चढ़ावा चोरी का मामला 7 जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन किया। एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसके आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की गई।
ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि की
इस बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि की है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने कहा कि दोनों के त्यागपत्र प्राप्त हो चुके हैं और 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने श्रद्धालुओं को भरोसा दिलाते हुए कहा कि भगवान श्रीराम को अर्पित सोना, चांदी, आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं।
जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
पुलिस अब आरोपियों की आर्थिक स्थिति, बैंक खातों, संपत्ति और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है। साथ ही मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया है। दोनों ने अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को दिया।
सूत्रों के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद की 18 और 19 जून को हरिद्वार में हुई बैठक के दौरान इस मामले पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने चढ़ावे के प्रबंधन और हिसाब-किताब को लेकर जानकारी ली। इसके बाद चंपत राय पर संगठन के भीतर दबाव बढ़ने लगा।
जांच और FIR के बाद बढ़ा दबाव
राम मंदिर चढ़ावा विवाद 7 जून को सामने आया था। इसके बाद गठित SIT की शुरुआती जांच में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं के संकेत मिले। जांच के आधार पर पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया।
हालांकि FIR में ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के नाम नहीं थे, लेकिन सोशल मीडिया और विपक्ष की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। इससे ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी बहस तेज हो गई।
इस्तीफे के पीछे बताई जा रहीं प्रमुख वजहें
सूत्रों के अनुसार, चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं—
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SIT की जांच में वित्तीय प्रबंधन से जुड़े सवाल उठना।
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FIR दर्ज होने और गिरफ्तारियों के बाद बढ़ता सार्वजनिक दबाव।
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चंपत राय के पूर्व ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम जांच में सामने आना।
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जांच की निष्पक्षता पर सवाल न उठें, इसलिए वरिष्ठ पदाधिकारियों का पद छोड़ना।
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राम मंदिर ट्रस्ट की साख और श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने की कोशिश।
संतों ने उठाई व्यापक जांच की मांग
हरिद्वार में हुई विश्व हिंदू परिषद की बैठक में कई संतों ने मांग की कि केवल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ही नहीं, बल्कि रामालय ट्रस्ट और श्रीराम जन्मभूमि निर्माण समिति के खातों एवं खर्चों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इसी बीच अयोध्या में 26 जून से प्रस्तावित विहिप की केंद्रीय प्रबंध समिति की चार दिवसीय बैठक भी स्थगित कर दी गई। माना जा रहा है कि बढ़ते विवाद और संतों के असंतोष को देखते हुए यह फैसला लिया गया।
कागभुशुंडि प्रतिमा और चांदी की ईंटों पर भी उठे सवाल
विवाद के दौरान कागभुशुंडि की प्रतिमा और चांदी की ईंटों को लेकर भी सवाल उठे। विपक्षी नेताओं ने सोशल मीडिया पर इनके गायब होने के आरोप लगाए। इसके बाद ट्रस्ट ने तस्वीरें जारी कर दावा किया कि कागभुशुंडि की प्रतिमा कारसेवकपुरम में सुरक्षित है, जबकि चांदी की ईंटें बैंक लॉकर में रखी गई हैं।
विहिप ने ट्रस्ट भंग करने की मांग को बताया गैरजरूरी
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि फिलहाल पूरे ट्रस्ट को भंग करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आरोप कुछ व्यक्तियों पर हैं, पूरे ट्रस्ट पर नहीं।
उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और भविष्य में मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक, निगरानी व्यवस्था और मजबूत वित्तीय प्रबंधन अपनाया जाना चाहिए।
फिलहाल चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब सबकी नजर SIT की जांच और ट्रस्ट की अगली प्रशासनिक व्यवस्था पर टिकी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका रही।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद: अयोध्या में केजरीवाल का BJP पर हमला, बोले- बड़े लोगों को बचाने के लिए FIR सिर्फ दिखावा
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या में भाजपा और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। रामलला के दर्शन के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि दर्ज की गई FIR केवल दिखावा है और इसमें बड़े जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
रामलला के दर्शन के बाद सरकार पर साधा निशाना
शुक्रवार सुबह रामलला के दर्शन करने पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जिन्होंने भगवान राम के नाम पर महापाप किया है, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि FIR में केवल छोटे कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूरे मामले के तार ऊंचे स्तर तक जुड़े हो सकते हैं।
केजरीवाल ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर कथित वित्तीय गड़बड़ी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों द्वारा संभव नहीं है और जांच का दायरा सभी जिम्मेदार लोगों तक पहुंचना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ को भी दी राजनीतिक नसीहत
केजरीवाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए कहा कि जो लोग राम मंदिर चढ़ावा विवाद में आरोपों का सामना कर रहे हैं, वही लोग उनकी राजनीतिक कुर्सी के खिलाफ भी साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को ऐसे लोगों का साथ नहीं देना चाहिए जिन पर गंभीर आरोप लगे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए कई आरोप
शाम को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने कहा कि भगवान राम के नाम पर करोड़ों श्रद्धालुओं ने मंदिर निर्माण में योगदान दिया, लेकिन अब मंदिर के चढ़ावे और दान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़े कई मामलों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप पहले भी उठ चुके हैं। साथ ही उन्होंने वर्ष 2021 में जमीन खरीद से जुड़े पुराने विवाद का भी जिक्र किया और निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
'सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों?'
केजरीवाल ने कहा कि यदि मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी वरिष्ठ पदाधिकारियों के पास थी, तो जांच भी उन्हीं तक पहुंचनी चाहिए। उनके अनुसार केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से लोगों के मन में संदेह और बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होनी चाहिए और यदि किसी भी स्तर पर दोष सिद्ध होता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पहले भी जारी कर चुके हैं वीडियो संदेश
इससे पहले भी अरविंद केजरीवाल वीडियो संदेश जारी कर राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
फिलहाल इस पूरे मामले की जांच SIT कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।