राम मंदिर चढ़ावा विवाद: चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा, बढ़ते दबाव और जांच के बीच लिया बड़ा फैसला
राम मंदिर चढ़ावा विवाद और SIT जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
अयोध्या के राम मंदिर में चंदा और चढ़ावा में कथित हेराफेरी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार और मंदिर प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि मंदिर प्रबंधन के शीर्ष पदाधिकारियों को जांच के दायरे से बाहर रखा गया है।
'प्रभु श्रीराम के नाम पर लूट मचाने वालों को मिली खुली छूट'
रोहिणी आचार्य ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में FIR दर्ज होना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जिन लोगों पर मंदिर के संपूर्ण प्रबंधन की जिम्मेदारी थी, उनके नाम FIR में क्यों शामिल नहीं किए गए।
उन्होंने इसे जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली कार्रवाई बताते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया महज एक 'आई-वॉश' नजर आती है।
प्रभु श्रीराम के नाम पर लूट मचाने वाले बड़े लूटेरों को दे दी गयी छूट ?
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) June 26, 2026
हैरानी की बात है राम मंदिर , अयोध्या के चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर तो दर्ज की गयी , मगर बड़े नामों, जिन पर मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी है , उनका नाम एफआईआर में नहीं डाला गया , क्या जाँच व् न्याय की… pic.twitter.com/yZb6jw5Vgl
चंपत राय और ट्रस्ट प्रबंधन पर उठाए सवाल
रोहिणी आचार्य ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य वरिष्ठ ट्रस्ट पदाधिकारियों का नाम लेते हुए पूछा कि यदि मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी शीर्ष स्तर पर थी, तो कानूनी जवाबदेही भी वहीं से तय क्यों नहीं की जा रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि FIR में केवल दानपात्र कक्ष के कर्मचारियों और निचले स्तर के लोगों को शामिल किया गया है, जबकि बड़े पदाधिकारियों को जांच से बाहर रखा गया है।
'जिम्मेदारी शीर्ष पर है तो जवाबदेही भी वहीं तय हो'
रोहिणी आचार्य ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि मंदिर के संचालन और वित्तीय व्यवस्था की जिम्मेदारी शीर्ष प्रबंधन के पास थी, तो जांच की शुरुआत भी वहीं से होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देशभर के श्रद्धालुओं के मन में यही सवाल है कि आखिर शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका की जांच क्यों नहीं हो रही।
BJP सरकार पर लगाए लीपापोती के आरोप
रोहिणी आचार्य ने भाजपा सरकार पर मामले को दबाने और लीपापोती करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का नाम FIR में शामिल नहीं होना, उसे स्वतः निर्दोष साबित नहीं करता।
उनका कहना था कि समय आने पर पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और यदि किसी की भूमिका पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल इस मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि FIR के आधार पर आगे की जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया है। दोनों ने अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को दिया।
सूत्रों के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद की 18 और 19 जून को हरिद्वार में हुई बैठक के दौरान इस मामले पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने चढ़ावे के प्रबंधन और हिसाब-किताब को लेकर जानकारी ली। इसके बाद चंपत राय पर संगठन के भीतर दबाव बढ़ने लगा।
जांच और FIR के बाद बढ़ा दबाव
राम मंदिर चढ़ावा विवाद 7 जून को सामने आया था। इसके बाद गठित SIT की शुरुआती जांच में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं के संकेत मिले। जांच के आधार पर पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया।