राजस्थान के बाड़मेर जिले में यातायात नियमों और धार्मिक आस्था से जुड़ा एक मामला चर्चा का विषय बन गया है। यहां एक वाहन मालिक का 500 रुपये का चालान केवल इसलिए काट दिया गया क्योंकि उसकी गाड़ी के आगे उसके इष्ट देव का नाम लिखा हुआ था। वाहन मालिक का दावा है कि उसकी गाड़ी में प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC), बीमा, सीट बेल्ट और अन्य सभी यातायात नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा था। ऐसे में केवल भगवान का नाम लिखे होने पर कार्रवाई किए जाने से विवाद खड़ा हो गया।
रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार और पुलिस पर साधा निशाना
मामले की जानकारी सामने आने के बाद शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, "क्या राम राज्य में अपने इष्ट का नाम लिखना भी गुनाह है?"
भाटी ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय, राजस्थान मुख्यमंत्री कार्यालय, राजस्थान पुलिस और बाड़मेर पुलिस को टैग करते हुए कहा कि यदि यातायात नियमों का पालन करवाना है तो कार्रवाई सभी पर समान रूप से होनी चाहिए। उन्होंने पुलिस प्रशासन से धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतने की भी अपील की।
वाहनों पर नाम या स्लोगन लिखने को लेकर क्या हैं नियम?
इस विवाद के बीच यह जानना जरूरी है कि मोटर वाहन अधिनियम और केंद्रीय मोटर वाहन नियम वाहनों पर नाम या स्लोगन लिखने के संबंध में क्या प्रावधान करते हैं।
1. नंबर प्लेट पर कुछ भी लिखना प्रतिबंधित
केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम-50 के अनुसार वाहन की नंबर प्लेट पर केवल पंजीकरण संख्या ही लिखी जा सकती है। नंबर प्लेट पर भगवान का नाम, जातिसूचक शब्द, राजनीतिक पद या किसी भी प्रकार का स्लोगन लिखना नियमों का उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में पुलिस मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालान कर सकती है।
2. विंडस्क्रीन और वाहन की बॉडी पर भी लागू हैं नियम
राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार वाहन के आगे या पीछे के शीशे तथा बॉडी पर बड़े अक्षरों में धार्मिक, जातिगत या पद सूचक शब्द लिखना भी नियमों के दायरे में आता है। प्रशासन का तर्क है कि ऐसे शब्द अन्य वाहन चालकों का ध्यान भटका सकते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।
3. किन धाराओं में हो सकती है कार्रवाई
ऐसे मामलों में पुलिस सामान्यतः मोटर वाहन अधिनियम की धारा 177 (सामान्य नियमों का उल्लंघन) या धारा 179 (अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना) के तहत चालान की कार्रवाई करती है।
आस्था बनाम कानून की बहस तेज
बाड़मेर की यह घटना अब केवल एक चालान का मामला नहीं रह गई है। एक ओर लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से जरूरी है। ऐसे में यह मामला अब कानून और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।