जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में 11 जून को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के कार्यक्रम के दौरान हुई बिजली गुल की घटना अब नया मोड़ ले चुकी है। इस मामले में सस्पेंड किए गए हीरापुरा 400 केवी जीएसएस के इलेक्ट्रीशियन बाबू सिंह ने विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
बाबू सिंह का दावा है कि घटना वाले दिन ग्रिड के ब्रेकर में तकनीकी खराबी थी और उसमें गैस की स्थिति सही नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने बिना शटडाउन लिए चालू लाइन में ही सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF6) गैस भरने का दबाव बनाया था, जो बेहद खतरनाक हो सकता था।
उनका कहना है कि अगर इस स्थिति में काम किया जाता तो ब्रेकर फटने का खतरा था, जिससे बड़ा हादसा हो सकता था और जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शटडाउन की मांग की थी, लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया।
बाबू सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि कोटा लाइन का ब्रेकर पिछले काफी समय से खराब था और इसकी लगातार शिकायत की जा रही थी। उनके अनुसार, कई बार अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से इसकी जानकारी दी गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब बड़े वीआईपी कार्यक्रम की जानकारी होती है, तो बिजली विभाग को समय पर अलर्ट क्यों नहीं किया गया और भाजपा प्रदेश कार्यालय में पावर बैकअप (DG सेट) की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं थी।
वहीं इस मामले में विभागीय अधिकारियों ने इसे आंतरिक प्रशासनिक मामला बताते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। ऊर्जा विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया जारी है और आगे की कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।
गौरतलब है कि 11 जून को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित मीडिया संवाद के दौरान 13 मिनट में तीन बार बिजली गुल हुई थी, जिसके बाद रेल मंत्री को अंधेरे में ही कार्यक्रम जारी रखना पड़ा था। प्रारंभिक जांच के बाद दो कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया था और एक वरिष्ठ अभियंता को चार्जशीट दी गई थी।